कर्नाटक की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ। लंबे समय से चल रही सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं पर आखिरकार विराम लग गया और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुबह से ही बेंगलुरु के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज थी और दोपहर तक तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई।
सिद्धारमैया ने अपने सरकारी आवास पर मंत्रियों और विधायकों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग की। इस दौरान माहौल काफी भावुक नजर आया। उन्होंने अपने तीन साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया, मंत्रियों का सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और फिर मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर दिया।
इस्तीफे के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिद्धारमैया ने साफ कहा कि उन्होंने पार्टी हाईकमान के निर्देश पर पद छोड़ा है। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही हाईकमान ने उनसे इस्तीफा देने को कहा था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय बने रहेंगे और राज्यसभा जाने का प्रस्ताव ठुकरा चुके हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डीके शिवकुमार के नाम की रही। सिद्धारमैया ने खुद अगले मुख्यमंत्री के तौर पर शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा। अब कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।
सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबे समय से नेतृत्व को लेकर खींचतान की खबरें आती रही हैं। ऐसे में यह बदलाव केवल मुख्यमंत्री बदलने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कर्नाटक कांग्रेस में शक्ति संतुलन के बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में डीके शिवकुमार के सामने सरकार को स्थिर रखना, संगठन और सत्ता के बीच तालमेल बनाना और विपक्ष के हमलों का जवाब देना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल, कर्नाटक की राजनीति में सत्ता का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है और पूरे देश की नजर अब इस बात पर टिकी है कि डीके शिवकुमार की अगुवाई में कांग्रेस सरकार किस दिशा में आगे बढ़ती है।