June 28, 2026

क्या खत्म होने वाला है घरेलू सहायकों का दौर?

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भारत में घरेलू सहायकों पर निर्भरता आने वाले वर्षों में बड़ी चुनौती बन सकती है। एक हालिया विश्लेषण में कहा गया है कि शिक्षा के बढ़ते स्तर, आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसरों के कारण घरेलू कामगारों की उपलब्धता लगातार घटेगी। ऐसे में भविष्य में विश्वसनीय घरेलू सहायकों की कमी एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक मुद्दा बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहले बड़ी संख्या में लोग सीमित रोजगार विकल्पों के कारण घरेलू कामकाज से जुड़े रहते थे। लेकिन अब बेहतर शिक्षा, कौशल विकास और अन्य क्षेत्रों में बढ़ते रोजगार अवसरों ने इस स्थिति को बदलना शुरू कर दिया है। इसके चलते घरेलू सहायकों की मांग और उपलब्धता के बीच का अंतर लगातार बढ़ने की आशंका है।

विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि भारत में घरेलू सहायकों की परंपरा सामाजिक और ऐतिहासिक संरचना से जुड़ी रही है, लेकिन बदलती अर्थव्यवस्था और जीवनशैली इस व्यवस्था को नई दिशा दे रही है। आने वाले समय में परिवारों को तकनीक, स्मार्ट घरेलू उपकरणों और पेशेवर सेवाओं पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल घरेलू कामकाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरी जीवन, रोजगार बाजार और सामाजिक ढांचे पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में परिवारों, नीति-निर्माताओं और सेवा क्षेत्र को समय रहते नई परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी करनी होगी, ताकि भविष्य में घरेलू सेवाओं की बढ़ती मांग को संतुलित किया जा सके।