June 28, 2026

RIMS निदेशक के इस्तीफे के लिए सरयू राय ने 100 करोड़ के कथित फर्जी बिल घोटाले को ठहराया जिम्मेदार

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झारखंड की राजनीति में रांची स्थित RIMS एक बार फिर सुर्खियों में है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने आरोप लगाया है कि RIMS के निदेशक डॉ. राजकुमार का इस्तीफा लगभग 100 करोड़ रुपये के कथित फर्जी डायग्नोस्टिक बिलों को मंजूरी देने के दबाव का परिणाम है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सरयू राय का दावा है कि निजी डायग्नोस्टिक एजेंसियों मेडल और हेल्थ मैप द्वारा प्रस्तुत बिलों में गंभीर अनियमितताएं थीं। उनके अनुसार, पूर्व निदेशक डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने भी कथित फर्जी बिलों का हवाला देते हुए भुगतान से इनकार किया था। राय का आरोप है कि बाद में डॉ. राजकुमार पर भी इन्हीं बिलों को पास करने का दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने प्रशासनिक आधार पर ऐसा करने से मना कर दिया।

विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने RIMS जैसी स्वायत्त संस्था के अधिकारों की अनदेखी की है। उनका कहना है कि RIMS अधिनियम और RIMS नियम 2002 के अनुसार संस्थान का संचालन उसकी गवर्निंग बॉडी के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की भूमिका की भी जांच कराने और पूरे मामले की CID जांच की मांग की है।

सरयू राय ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि लगातार तीन RIMS निदेशकों—डॉ. डी.के. सिंह, डॉ. कामेश्वर प्रसाद और डॉ. राजकुमार—के कार्यकाल समय से पहले समाप्त होने के कारणों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। फिलहाल ये आरोप राजनीतिक विवाद का विषय बने हुए हैं और मामले में किसी जांच एजेंसी या अदालत द्वारा इनकी पुष्टि नहीं हुई है।