June 16, 2026

LPG संकट का ऐसा असर कि थम गया देश का सबसे बड़ा बंदरगाह, भूखे ड्राइवरों के पलायन से 40 हजार कंटेनर फंसे

Containers-pile-up-at-JNPT-awaiting-trailer-availability-for-movement-out-of-the-port.-Express-photo-by-Narendra-Vaskar

मुंबई: क्या कभी आपने सोचा है कि कुछ ट्रक चालकों के काम छोड़ देने से पूरे देश का व्यापार प्रभावित हो सकता है? लेकिन देश के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) में कुछ ऐसा ही हुआ। पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बाद LPG सप्लाई प्रभावित हुई, कीमतें बढ़ीं और हालात इतने बिगड़ गए कि हजारों प्रवासी ड्राइवरों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया।

25 वर्षीय ट्रेलर चालक राकेश कुमार बताते हैं कि हालात इतने खराब हो गए थे कि उन्हें लगातार दो दिन सिर्फ पानी पीकर गुजारने पड़े। ढाबे बंद हो रहे थे और जो खुले थे, वहां खाना इतना महंगा हो चुका था कि जेब जवाब दे रही थी। आखिरकार उन्होंने मार्च में काम छोड़ दिया और अपने घर लौट गए।

लेकिन यह सिर्फ एक ड्राइवर की कहानी नहीं थी। सैकड़ों ड्राइवरों ने इसी मजबूरी में काम छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि देश के सबसे व्यस्त कंटेनर पोर्ट पर कंटेनरों का पहाड़ खड़ा हो गया। देखते ही देखते करीब 40 हजार कंटेनर बंदरगाह परिसर में फंस गए और माल ढुलाई की रफ्तार थम गई।

जिस पोर्ट से देश का बड़ा हिस्सा आयात-निर्यात होता है, वहां ट्रेलरों की कमी ने सप्लाई चेन को हिला कर रख दिया। उद्योगों, व्यापारियों और निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। तीन महीने बाद भी बंदरगाह पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं लौट पाया है और संकट की कीमत अब भी चुकाई जा रही है।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मजदूर और ड्राइवर जब संकट में पड़ते हैं तो उसका असर सिर्फ उनके परिवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा व्यापारिक तंत्र इसकी चपेट में आ जाता है।