Manoharpur (Chaibasa) : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। नंदपुर पंचायत के डोंगाकाटा नीचे टोला निवासी 31 वर्षीय खुशबू खंडाइत और उनकी नवजात बच्ची की मृत्यु के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। शादी के 10 साल लंबे इंतजार के बाद घर में गूंजने वाली किलकारियों की उम्मीद, चंद घंटों में ही मातम में बदल गई।
सुबह भर्ती, शाम तक उजड़ गया संसार
मृतका के पति रोहित खंडाइत ने बताया कि खुशबू को शनिवार सुबह करीब 9 बजे प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोपहर करीब 4:22 बजे सामान्य प्रसव की प्रक्रिया के दौरान खुशबू ने एक मृत बच्ची को जन्म दिया। परिजनों का कहना है कि प्रसव के तुरंत बाद खुशबू की स्थिति स्थिर थी, लेकिन अपनी मृत संतान की खबर सुनकर उन्हें गहरा सदमा लगा। इसके बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और शाम करीब 7 बजे उन्होंने भी दम तोड़ दिया। अस्पताल परिसर में इस घटना के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
“सफेद हाथी” बनी अल्ट्रासाउंड मशीन
इस दुखद घटना के बाद मनोहरपुर प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम गोप ने परिजनों के साथ मिलकर अस्पताल की चरमराई चिकित्सा व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने इसे घोर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए:
विशेषज्ञों की कमी : अस्पताल में न तो कोई सर्जन तैनात है और न ही कोई महिला रोग विशेषज्ञ (Gynecologist), जिसके कारण जटिल मामलों में मरीजों की जान जोखिम में रहती है।
मशीन है पर ऑपरेटर नहीं : अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तो उपलब्ध है, लेकिन टेक्नीशियन न होने के कारण मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा।
समय पर रेफर न करना : परिजनों का तर्क है कि यदि प्रसव में कोई जटिलता थी, तो समय रहते जांच कर मरीज को बड़े अस्पताल रेफर क्यों नहीं किया गया?
जांच और कार्रवाई की मांग
मृतका के परिजनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने और अस्पताल की व्यवस्था को तुरंत सुदृढ़ करने की अपील की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार की खुशियां इस तरह सिस्टम की भेंट न चढ़ें।
वर्तमान में पूरे गांव में इस घटना को लेकर गहरा शोक व्याप्त है। 10 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद जिस परिवार में उत्सव का माहौल होना चाहिए था, वहां अब केवल सन्नाटा और सिसकियाँ हैं। प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।