June 20, 2026

महाराष्ट्र में बगावत का नया अध्याय शुरू?

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महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजरती दिख रही है। शिवसेना के स्थापना के 60 साल पूरे होने के बीच उद्धव ठाकरे गुट पर नए राजनीतिक संकट के बादल मंडरा रहे हैं। छह सांसदों द्वारा अलग होने के संकेतों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है, जिससे पुराने सियासी घाव फिर से चर्चा में आ गए हैं।

दरअसल, महाराष्ट्र का राजनीतिक इतिहास सिर्फ चुनावी मुकाबलों का नहीं, बल्कि बगावत, दल-बदल और सत्ता के लिए बने-बिगड़े गठबंधनों का भी रहा है। 1969 में कांग्रेस के ऐतिहासिक विभाजन से शुरू हुई यह कहानी शरद पवार की राजनीतिक बगावत, एनसीपी के गठन और फिर शिवसेना के कई बड़े विद्रोहों तक पहुंची। हर दौर में सत्ता समीकरण बदले और नए राजनीतिक चेहरे उभरे।

सबसे बड़ा मोड़ 2022 में आया, जब एकनाथ शिंदे की बगावत ने उद्धव ठाकरे सरकार को गिरा दिया। इसके बाद शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न भी शिंदे गुट के पास चला गया। 2023 में अजित पवार ने एनसीपी में बड़ी टूट कराकर राजनीतिक समीकरणों को और बदल दिया। इन घटनाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति को पूरी तरह नई दिशा दे दी।

अब 2026 में उद्धव ठाकरे गुट के सामने एक और चुनौती खड़ी होती दिख रही है। लोकसभा में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या महाराष्ट्र फिर किसी नई राजनीतिक बगावत का गवाह बनने जा रहा है, या ठाकरे गुट इस संकट को संभाल लेगा? आने वाले दिनों में इसका जवाब राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।