June 11, 2026

मंच पर गूंजती तालियां, घर में संघर्ष की कहानी! छऊ नृत्य के महान कलाकार परीक्षित महतो का जीवन पढ़कर भावुक हो जाएंगे आप

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बोकारो: जब भी छऊ नृत्य की बात होती है, परीक्षित महतो का नाम सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है। अपनी कला से देश-दुनिया में पहचान बनाने वाले इस कलाकार की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और जुनून की भी कहानी है।

आज जिन परीक्षित महतो को छऊ नृत्य का बड़ा नाम माना जाता है, उन्होंने अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए लंबा और कठिन सफर तय किया है। आर्थिक चुनौतियां, संसाधनों की कमी और जीवन की तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया।

जब कला ही बन गई जिंदगी

परीक्षित महतो बचपन से ही छऊ नृत्य के प्रति आकर्षित थे। गांव की सांस्कृतिक परंपराओं के बीच पले-बढ़े महतो ने बहुत कम उम्र में इस लोकनृत्य को अपना जीवन बना लिया। जहां कई लोग बेहतर अवसरों की तलाश में अपनी कला छोड़ देते हैं, वहीं उन्होंने हर कठिनाई के बावजूद छऊ को ही अपनी पहचान बनाया।

उनकी मेहनत और लगन का परिणाम यह हुआ कि आज उनका नाम छऊ नृत्य की दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है। मंच पर उनकी प्रस्तुति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है और युवा कलाकार उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

सम्मान मिला, लेकिन संघर्ष खत्म नहीं हुआ

कला के क्षेत्र में पहचान और सम्मान मिलने के बावजूद उनका जीवन आसान नहीं रहा। कई बार आर्थिक परेशानियों ने रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनका मानना है कि कलाकार की असली ताकत उसकी कला और उसके प्रति समर्पण में होती है।

परीक्षित महतो की कहानी यह भी दिखाती है कि लोककलाओं को जीवित रखने वाले कलाकार अक्सर उन सुविधाओं से दूर रहते हैं, जिनके वे हकदार हैं। इसके बावजूद वे अपनी संस्कृति और परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम लगातार करते रहते हैं।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

आज परीक्षित महतो सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल बन चुके हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि यदि जुनून सच्चा हो तो सीमित संसाधन भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकते।

छऊ नृत्य की विरासत को आगे बढ़ाने में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनकी कहानी उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को सच करने का साहस रखते हैं।

परीक्षित महतो की यह यात्रा हमें याद दिलाती है कि असली सफलता केवल पुरस्कारों में नहीं, बल्कि उन संघर्षों में छिपी होती है जिन्हें पार कर कोई व्यक्ति अपनी पहचान बनाता है।

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