June 22, 2026

NEET Re-Exam 2026:नीट 2026: ‘सब बेचकर बेटी को डॉक्टर बनाना चाहा’, कुछ मिनटों की देरी ने तोड़ा पिता का सपना, सेंटर के बाहर फूट-फूटकर रोए

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सर्च न्यूज: सच के साथ: नीट यूजी री-एग्जाम 2026 के दौरान मध्य प्रदेश के विदिशा परीक्षा केंद्र से एक अत्यंत भावुक और दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सिर्फ चंद मिनट की देरी की वजह से एक छात्रा को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद परीक्षा केंद्र के गेट पर छात्रा के पिता फूट-फूटकर रोने लगे और सिस्टम के कड़े नियमों के आगे बेबस होकर गिर पड़े।

परेशानी की वजह: 21 जून 2026 को आयोजित हुई इस पुनर्परीक्षा में शामिल होने के लिए रागिनी विश्वकर्मा नाम की छात्रा अपने पिता के साथ बाइक से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित अपने गांव से रवाना हुई थी। रास्ते में खराब मौसम, तेज बारिश और बाइक पंक्चर हो जाने के कारण उन्हें परीक्षा केंद्र पहुँचने में देरी हो गई।

पिता का संघर्ष और त्याग: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिता ने अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने के सपने को पूरा करने के लिए अपनी जमीन-जायदाद और जमापूंजी तक दांव पर लगा दी थी ताकि वह दिन-रात मेहनत कर सके।

गेट पर बेबसी का मंजर: परीक्षा केंद्र (गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज, विदिशा) पर प्रवेश का अंतिम समय दोपहर 1:30 बजे तय था। कुछ ही मिनटों की देरी से पहुंचने के कारण सुरक्षाकर्मियों ने गेट बंद कर दिया। छात्रा के पिता गेट के बाहर खड़े होकर अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे, “भाई साहब अंदर आने दो, बेटी का साल बर्बाद हो जाएगा”। जब कड़े नियमों के कारण एंट्री नहीं मिली, तो पिता ने हताशा में लोहे के गेट पर अपना सिर दे मारा और सड़क पर ही बदहवास होकर गिर गए।

बायोमीट्रिक और एडमिट कार्ड की अन्य खामियां: इस परीक्षा केंद्र पर रागिनी के अलावा दो अन्य छात्राएं (स्नेहा दुबे और अक्षत श्रीवास्तव) भी नियमों की वजह से परीक्षा से वंचित रह गईं। अधिकारियों के अनुसार, एक छात्रा 2 मिनट लेट पहुंची और सिस्टम में उसका बायोमीट्रिक थंब वेरिफिकेशन फेल हो गया, जबकि दूसरी छात्रा नए री-एग्जाम एडमिट कार्ड के बजाय पुराना निरस्त हो चुका एडमिट कार्ड लेकर आ गई थी।

सिस्टम पर खड़े हुए सवाल

3 मई 2026 को आयोजित हुई मूल नीट परीक्षा को पेपर लीक और अन्य धांधलियों के चलते सरकार द्वारा रद्द कर दिया गया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और प्रशासनिक नियमों पर तीखे सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब पेपर लीक माफियाओं की वजह से लाखों छात्रों की मेहनत बर्बाद हुई तब सरकारी तंत्र सो रहा था, लेकिन एक गरीब पिता और उसकी मासूम बेटी को चंद मिनटों की लाचारी के लिए इतनी बड़ी सजा भुगतनी पड़ रही है।

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