नर्मदा और सोन की ‘अधूरी प्रेम कहानी’ अब होगी पूरी! 1600 करोड़ की सुरंग बदल देगी मध्य प्रदेश की तकदीर
भोपाल/कटनी। मध्य प्रदेश की धरती पर लगभग दो दशक से चल रही एक ऐतिहासिक परियोजना अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। विंध्याचल की पहाड़ियों के नीचे बन रही भारत की सबसे लंबी सिंचाई सुरंग जल्द ही नर्मदा और सोन नदियों को जोड़ने जा रही है। यह सिर्फ एक इंजीनियरिंग चमत्कार नहीं, बल्कि उस लोककथा को भी नया मोड़ देने वाली है जिसमें नर्मदा और सोन को बिछड़े प्रेमी माना जाता है।
इस सुरंग के जरिए रानी अवंतीबाई सागर (बरगी) बांध से नर्मदा का पानी विंध्य पर्वतमाला के नीचे से होकर सोन नदी बेसिन तक पहुंचेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों को मिलेगा जो वर्षों से पानी की कमी और सूखे की मार झेलते रहे हैं।
1450 गांवों की बदलेगी तस्वीर
बरगी डायवर्जन परियोजना के पूरा होते ही कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जैसे जिलों के लगभग 1450 गांवों में सिंचाई की नई उम्मीद जगेगी। करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को पानी मिलेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और खेती की तस्वीर बदल जाएगी। साथ ही जबलपुर और कटनी क्षेत्र को पेयजल तथा औद्योगिक उपयोग के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।
संघर्ष, हादसे और चुनौतियों से भरा सफर
इस सुरंग का निर्माण आसान नहीं था। पिछले कई वर्षों में परियोजना ने मशीनों की खराबी, तकनीकी अड़चनों, भूगर्भीय चुनौतियों और कई दर्दनाक हादसों का सामना किया। यही वजह है कि शुरुआती अनुमानित लागत 799 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 1600 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
फिलहाल 300 से अधिक इंजीनियर और श्रमिक दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर इस ऐतिहासिक सुरंग को पूरा किया जा सके।
जब लोककथा बनेगी हकीकत
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार नर्मदा और सोनभद्र का जन्म एक ही क्षेत्र में हुआ था, लेकिन दोनों कभी मिल नहीं पाए और विपरीत दिशाओं में बहते रहे। सदियों से चली आ रही इस कथा को अब आधुनिक इंजीनियरिंग नया अर्थ देने जा रही है। पहली बार नर्मदा का जल सोन बेसिन तक पहुंचेगा और लोगों का मानना है कि बिछड़े प्रेमियों का यह प्रतीकात्मक मिलन इतिहास में दर्ज होगा।
भारत की सबसे लंबी सिंचाई सुरंग सिर्फ पानी का रास्ता नहीं बना रही, बल्कि यह मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के सपनों, विकास की नई उम्मीदों और एक पुरानी लोककथा के नए अध्याय को भी जन्म देने जा रही है।
