देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। पिछले चार दिनों में दूसरी बार तेल के दाम बढ़ाए गए हैं, जिसके बाद सियासत भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने सरकार को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा है कि महंगाई अब लोगों की कमर तोड़ रही है।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी नेताओं ने बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया से लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस तक, विपक्ष का एक ही आरोप है — “महंगाई पर सरकार का नियंत्रण कमजोर पड़ता दिख रहा है।”
वहीं बीजेपी नेताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और वैश्विक तनाव का असर भारत पर भी पड़ रहा है। सरकार के मुताबिक यह फैसला आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए लिया गया है।
लेकिन आम जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रोजमर्रा की जिंदगी कितनी और महंगी होगी? पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर सब्जियों, राशन, ट्रांसपोर्ट और दूसरे जरूरी सामानों की कीमतों पर भी पड़ता है।
दिल्ली, मुंबई समेत कई बड़े शहरों में लोग पहले ही बढ़ते खर्चों से परेशान हैं। ऐसे में तेल की नई कीमतों ने लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग मीम्स और प्रतिक्रियाओं के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में अब यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा बन सकता है। विपक्ष इसे जनता से जुड़ा बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है, जबकि सरकार वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देकर अपने फैसले को सही ठहराने में जुटी है।
फिलहाल जनता के मन में बस एक ही सवाल घूम रहा है — क्या आने वाले दिनों में राहत मिलेगी, या फिर “अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे और महंगाई है” सच साबित होने वाला है?