सर्च न्यूज: सच के साथ: भारत के चर्चित “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर एक बार फिर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। भारतीय वायुसेना द्वारा जारी वीडियो और सैन्य अधिकारियों के ताज़ा बयानों ने इस ऑपरेशन को आधुनिक भारत के सबसे बड़े हाई-टेक काउंटर-टेरर मिशनों में शामिल कर दिया है।
सूत्रों और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ एक एयरस्ट्राइक नहीं था, बल्कि महीनों तक चली खुफिया निगरानी, साइबर ट्रैकिंग, सैटेलाइट सर्विलांस और जमीनी एजेंट नेटवर्क का संयुक्त मिशन था।
बताया जा रहा है कि भारतीय एजेंसियों ने आतंकियों के ठिकानों, मूवमेंट और संचार नेटवर्क पर लंबे समय तक नजर रखी। इसके लिए रियल-टाइम इंटेलिजेंस, ड्रोन मॉनिटरिंग, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और हाई-प्रिसिशन टारगेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मिशन की सबसे बड़ी ताकत उसकी “इंटेलिजेंस फ्यूजन” थी, जहां सेना, तकनीकी एजेंसियों और बाहरी खुफिया इकाइयों ने मिलकर काम किया।
कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सीमापार मौजूद आतंकी ढांचे की गतिविधियों पर डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए लगातार नजर रखी जा रही थी। संदिग्ध लोकेशन, कम्युनिकेशन पैटर्न और मूवमेंट डेटा को AI-आधारित विश्लेषण सिस्टम से जोड़ा गया, जिससे टारगेट की सटीक पहचान संभव हो सकी।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, मिशन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम का भी इस्तेमाल हुआ, जिससे दुश्मन के संचार और निगरानी नेटवर्क को बाधित किया गया। इसी के साथ हाई-प्रिसिशन हथियारों की मदद से चुनिंदा ठिकानों पर कार्रवाई की गई, ताकि कोलेटरल डैमेज न्यूनतम रहे।
रक्षा मामलों के जानकार इसे 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत की सबसे रणनीतिक जवाबी कार्रवाई मान रहे हैं। उनका कहना है कि अब भारत की सुरक्षा रणनीति सिर्फ सीमा पर जवाब देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि साइबर इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सर्विलांस और मल्टी-लेयर ऑपरेशन्स की तरफ तेजी से बढ़ रही है।
हालांकि मिशन के कई पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन “ऑपरेशन सिंदूर” ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ बंदूक और मिसाइलों से नहीं, बल्कि डेटा, ड्रोन, साइबर नेटवर्क और खुफिया समन्वय से भी लड़ा जा रहा है।