May 27, 2026

“पुणे पोर्शे केस में नया बवाल: आरोपी के पिता का ‘जश्न’ वीडियो वायरल, पीड़ित परिवार बोला- क्या खत्म हो गया कानून का डर?”

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पुणे पोर्शे क्रैश केस एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। इस बार वजह अदालत की सुनवाई नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक कथित वीडियो है, जिसमें नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल परिवार के साथ पार्टी और डांस करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही पीड़ित परिवार का गुस्सा फूट पड़ा और न्याय व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

दरअसल, यह वही मामला है जिसने मई 2024 में पूरे देश को झकझोर दिया था। पुणे के कल्याणी नगर इलाके में तेज रफ्तार पोर्शे कार ने बाइक सवार दो आईटी प्रोफेशनल्स को कुचल दिया था। आरोप था कि कार 17 वर्षीय नाबालिग चला रहा था और वह शराब के नशे में था। हादसे के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था और मामले में पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट और ब्लड सैंपल से छेड़छाड़ के आरोप भी लगे थे।

अब इस केस में नया मोड़ तब आया जब आरोपी के पिता का एक वीडियो वायरल होने लगा। वीडियो में विशाल अग्रवाल फूलों और नोटों की माला पहने, रेस्टोरेंट जैसी जगह पर परिवार के साथ जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं। बैकग्राउंड में संगीत बज रहा है और लोग तालियां बजाते नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद का है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वीडियो के सामने आते ही पीड़ित परिवार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। हादसे में जान गंवाने वाले युवकों में से एक के पिता सुरेश कोश्टा ने कहा कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि आम लोगों की भावनाओं और न्याय व्यवस्था का मजाक है। उनका कहना है कि जब गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लोग खुलेआम जश्न मनाते दिखें, तो लोगों का कानून से भरोसा कमजोर होता है।

उन्होंने यह भी मांग की कि आरोपी की जमानत रद्द की जाए और मामले में सबूतों से छेड़छाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर ऐसे मामलों में कड़ा संदेश नहीं दिया गया, तो समाज में कानून का डर खत्म हो जाएगा।

सोशल मीडिया पर भी वीडियो को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे “संवेदनहीनता” बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद इस तरह का सार्वजनिक व्यवहार लोगों की भावनाओं को भड़काता है।

फिलहाल केस की सुनवाई जारी है और जांच एजेंसियां पहले से ही सबूतों में हेरफेर की साजिश के आरोपों की जांच कर रही हैं। लेकिन वायरल वीडियो ने इस पूरे मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है — सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि न्याय और जवाबदेही पर जनता के भरोसे का भी है।