June 16, 2026

RSS पर पारदर्शिता की मांग से गरमाई सियासत! मोहन भागवत का पलटवार—‘जवाबदेही नहीं, राजनीति है मकसद’

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस बार विवाद की वजह बना है कांग्रेस नेता और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे का वह पत्र, जिसमें उन्होंने संघ की पंजीकरण स्थिति, फंडिंग के स्रोत, आय-व्यय और संपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग की थी। अब इस मुद्दे पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह मांग जवाबदेही की चिंता से ज्यादा राजनीति से प्रेरित नजर आती है।

दरअसल, प्रियंक खड़गे ने हाल ही में एक खुला पत्र लिखकर सवाल उठाया था कि देशभर में हजारों शाखाएं चलाने वाले और व्यापक सामाजिक प्रभाव रखने वाले संगठन को भी उसी तरह पारदर्शिता के मानकों का पालन करना चाहिए, जैसा अन्य संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों और धार्मिक ट्रस्टों से अपेक्षित होता है।

हालांकि, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इन सवालों को खारिज करते हुए कहा कि RSS किसी प्रकार का सरकारी अनुदान नहीं लेता और इसलिए उस पर ऐसे नियम लागू करने की मांग का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह की बहसें अक्सर राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होती हैं और इन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही की बात कर रही है, तो दूसरी ओर RSS और उससे जुड़े लोग इसे राजनीतिक हमला बता रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा केवल संगठनात्मक व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह बहस और व्यापक रूप ले सकती है, क्योंकि इसमें पारदर्शिता, सार्वजनिक जवाबदेही और राजनीतिक विचारधाराओं के टकराव जैसे कई अहम पहलू जुड़े हुए हैं।

फिलहाल एक बात साफ है—RSS को लेकर शुरू हुई यह नई बहस केवल एक पत्र या एक बयान तक सीमित नहीं है। यह मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।