June 24, 2026

संघर्ष, समर्पण और सफलता की कहानी: चाणक्य आईएस एकेडमी की महाप्रबंधक रीमा मिश्रा से विशेष बातचीत

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आज हम बात कर रहे हैं Ms. Reema Mishra, General Manager of Chanakya IAS Academy Jharkhand से, जो UPSC और JPSC सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले अग्रणी संस्थानों में से एक है।

​किसी भी बड़ी सफलता की नींव अटूट धैर्य और संघर्ष पर टिकी होती है। रीमा मिश्रा जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे मजबूत, तो समाज की चुनौतियों और व्यक्तिगत संघर्षों को पार कर एक नई मिसाल कायम की जा सकती है।

सफलता का मंत्र: “पीछे मुड़कर न देखना”

अपने करियर की शुरुआत 1993 में करने वाली रीमा जी बताती हैं कि इस क्षेत्र में आना उनके परिवार के सहयोग से संभव हुआ। हालाँकि, शुरुआती दिनों में उन्हें समाज के उपहास और कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वे कहती हैं, “ऐसा जिंदगी में बहुत बार आता है जब लगता है कि अब हार रहे हैं, लेकिन इसका एक ही तोड़ है—कभी पीछे मुड़कर मत देखिए, हमेशा आगे देखने की कोशिश कीजिए”।

​उन्होंने गुजरात के भूकंप जैसी कठिन परिस्थितियों को भी झेला और दिल्ली से झारखंड तक के सफर में परिवारिक जिम्मेदारियों और व्यवसाय के बीच संतुलन बनाने की कला सीखी। उनके लिए सफलता का अर्थ है निरंतर आगे बढ़ते रहना और शिक्षा को हर घर तक पहुँचाना।

​भावी अधिकारियों के लिए प्रेरणा

अपने भाई और ‘सक्सेस गुरु’ ए.के. मिश्रा जी को अपना प्रेरणा स्रोत मानने वाली रीमा जी का मानना है कि वे भविष्य की दृष्टि रखते हैं, धैर्यवान हैं और उनमें डर नाम की कोई चीज नहीं है।

UPSC और सिविल सेवा के छात्रों को प्रेरित करते हुए वे आज के दौर की “लग्जरी लाइफ” और केवल ऑनलाइन पढ़ाई के प्रति बढ़ते रुझान पर चिंता जताती हैं। वे कहती हैं:

​संघर्ष का महत्व: “बहुत लग्जरी ज़ोन में रह करके पढ़ाई नहीं होती। अगर आप बेड पर रहिएगा, तो नींद आना स्वाभाविक है”।

प्रतिस्पर्धा की शक्ति: ऑफलाइन क्लासरूम में सैकड़ों छात्रों के बीच रहकर पढ़ाई करने से जो कंपटीशन और डाउट सॉल्व करने का माहौल मिलता है, वह घर के एकांत में संभव नहीं है।

सीख: छात्रों को ‘श्रीकांत’ फिल्म के नायक की तरह चुनौतियों को स्वीकार करना चाहिए और अपना कंफर्ट जोन छोड़ना चाहिए।

एक संकल्प: “हर घर से ऑफिसर”

रीमा जी का विजन बहुत ही स्पष्ट और प्रेरणादायक है—उनका लक्ष्य है कि झारखंड के हर घर से बच्चे शिक्षा से जुड़ें और अधिकारी बनें। वे मानती हैं कि शिक्षा ही सबसे बड़ी जरूरत है, और यदि छात्र सही कोचिंग का चुनाव करें और कड़ी मेहनत करें, तो सफलता निश्चित है।

चाणक्य आईएस एकेडमी का यह संकल्प कि वे न केवल 5500, बल्कि आने वाले समय में हजारों और आईएएस अधिकारी तैयार करेंगे, उन सभी युवाओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण है जो प्रशासनिक सेवा में अपना भविष्य देख रहे हैं।

यह लेख उन सभी अभ्यर्थियों के लिए है जो अपने सपनों को सच करने की राह में संघर्ष कर रहे हैं। याद रखिए, आपकी मेहनत ही आपको भीड़ से अलग बनाएगी!