चीनी स्टील से बढ़ी चिंता, भारत करेगा बड़ा फैसला?
भारत में लगातार बढ़ते चीनी स्टील आयात ने घरेलू इस्पात उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने संकेत दिया है कि अगले दो महीनों तक आयात की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, जिसके बाद यह तय किया जाएगा कि चीन से आने वाले सस्ते स्टील पर अतिरिक्त प्रतिबंध या एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया जाए या नहीं। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े कच्चे इस्पात उत्पादक भारत के लिए यह फैसला उद्योग और व्यापार दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अप्रैल 2026 में चीन से भारत आने वाले तैयार स्टील का आयात दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। भारतीय इस्पात कंपनियों का कहना है कि चीन से कम कीमत पर आने वाला स्टील घरेलू उद्योग के लिए चुनौती बनता जा रहा है। हालांकि सरकार ने पिछले वर्ष कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क लगाया था, लेकिन उद्योग का मानना है कि उससे अपेक्षित राहत नहीं मिली है।
इसी बीच इस्पात मंत्रालय ने धातुकर्म कोक (मेटलर्जिकल कोक) पर लगाए गए अस्थायी एंटी-डंपिंग शुल्क को वापस लेने की भी सिफारिश की है। मंत्रालय का तर्क है कि देश में इसकी आपूर्ति पर्याप्त नहीं है और कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। अब उद्योग और बाजार की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी है, क्योंकि आने वाले महीनों में लिया गया फैसला भारत के इस्पात क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और व्यापार नीति की दिशा तय कर सकता है।
