संघर्ष, समर्पण और सफलता की कहानी: चाणक्य आईएस एकेडमी की महाप्रबंधक रीमा मिश्रा से विशेष बातचीत
सर्च न्यूज: सच के साथ: किसी भी बड़ी सफलता की नींव अटूट धैर्य और संघर्ष पर टिकी होती है। रीमा मिश्रा जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे मजबूत, तो समाज की चुनौतियों और व्यक्तिगत संघर्षों को पार कर एक नई मिसाल कायम की जा सकती है।
आज हम बात कर रहे हैं Ms. Reema Mishra, General Manager of Chanakya IAS Academy Jharkhand से, जो UPSC और JPSC सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले अग्रणी संस्थानों में से एक है।
रीमा मिश्रा जी के साक्षात्कार के उत्तर
प्रश्न 1. आप व्यवसाय के क्षेत्र में कब और कैसे आईं?
उत्तर मैं शिक्षा के क्षेत्र में सेवा भाव से जुड़ी। मेरा उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं था, बल्कि युवाओं को सही मार्गदर्शन देकर उन्हें अधिकारी बनाना था। इसी सोच के साथ मैं चाणक्य IAS अकादमी से जुड़ी और धीरे-धीरे प्रबंधन, छात्र कल्याण तथा संस्थान के विकास की जिम्मेदारियाँ संभालते हुए इस क्षेत्र में आगे बढ़ी।
प्रश्न 2. आपको अपने पति और बच्चों का कितना सहयोग मिलता है, और आपकी सफलता में उनकी क्या भूमिका रही है?
उत्तर मेरे पति श्री विनय मिश्रा जी का सहयोग मेरी सबसे बड़ी ताकत रहा है। उन्होंने हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। परिवार का सहयोग ही वह मजबूत आधार है, जिसके कारण मैं शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में अपना योगदान दे पा रही हूँ। बच्चों ने भी हमेशा मेरे कार्यों का सम्मान किया और मुझे सकारात्मक ऊर्जा दी।
प्रश्न 3.शुरुआती दिनों में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
उत्तर शुरुआती दिनों में संसाधनों की कमी, छात्रों और अभिभावकों का विश्वास जीतना तथा छोटे शहरों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था करना बड़ी चुनौतियाँ थीं। विशेष रूप से छात्राओं की सुरक्षा, आवास और शिक्षा की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करना भी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी। लेकिन निरंतर मेहनत और ईमानदारी से इन चुनौतियों को अवसर में बदला।
प्रश्न 4. एक महिला उद्यमी के रूप में आपकी सबसे बड़ी सीख क्या रही?
उत्तर मेरी सबसे बड़ी सीख यह रही कि आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतरता के साथ कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। यदि महिला स्वयं पर विश्वास रखे और समाज के हित को अपने कार्य का केंद्र बनाए, तो सफलता उसके कदम चूमती है।
प्रश्न 5. परिवार और व्यवसाय के बीच संतुलन आप कैसे बनाती हैं?
उत्तर मैं समय प्रबंधन को बहुत महत्व देती हूँ। परिवार और संस्थान दोनों मेरी प्राथमिकता हैं। स्पष्ट योजना, जिम्मेदारियों का सही विभाजन और परिवार के सहयोग से मैं दोनों के बीच संतुलन बना पाती हूँ।
प्रश्न 6. आपके जीवन के सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत कौन हैं?
उत्तर मेरे माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कार, मेरे पति का मार्गदर्शन और मेरे छात्र मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। जब मैं अपने विद्यार्थियों को अधिकारी बनते देखती हूँ, तो वही मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा और खुशी का स्रोत होता है।
प्रश्न 7. क्या कभी ऐसा समय आया जब आपने हार मानने का सोचा हो? उस समय आपने खुद को कैसे संभाला?
उत्तर जीवन में कठिन परिस्थितियाँ हर व्यक्ति के सामने आती हैं। कई बार चुनौतियाँ बहुत बड़ी लगीं, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। ईश्वर में विश्वास, परिवार का सहयोग और अपने उद्देश्य के प्रति समर्पण ने मुझे हमेशा आगे बढ़ने की शक्ति दी। मेरा मानना है कि कठिन समय भी हमें कुछ न कुछ सिखाने के लिए आता है।
प्रश्न 8. सफलता को आप किस तरह परिभाषित करती हैं?
उत्तर मेरे लिए सफलता केवल पद, प्रतिष्ठा या आर्थिक उपलब्धि नहीं है। वास्तविक सफलता तब है जब आपके कारण किसी का जीवन बेहतर बने, किसी विद्यार्थी का सपना पूरा हो और समाज में सकारात्मक परिवर्तन आए।
प्रश्न
उत्तर मेरा संदेश है कि बड़े सपने देखिए, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए अनुशासन, मेहनत और धैर्य भी रखिए। असफलता से घबराइए नहीं, क्योंकि वही सफलता की पहली सीढ़ी होती है। निरंतर सीखते रहिए और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखिए।
प्रश्न 10. आने वाले वर्षों में चाणक्य IAS अकादमी के लिए आपका विजन क्या है?
उत्तर मेरा विजन है कि चाणक्य IAS अकादमी देश के हर प्रतिभाशाली छात्र तक गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन पहुँचाए। विशेष रूप से बेटियों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अवसर प्रदान करना हमारी प्राथमिकता रहेगी। हमारा सपना है—”हर घर में एक अधिकारी हो”। इसी लक्ष्य के साथ हम शिक्षा, मार्गदर्शन और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में और अधिक प्रभावी योगदान देना चाहते हैं।
सफलता का मंत्र: “पीछे मुड़कर न देखना”
अपने करियर की शुरुआत 1993 में करने वाली रीमा जी बताती हैं कि इस क्षेत्र में आना उनके परिवार के सहयोग से संभव हुआ। हालाँकि, शुरुआती दिनों में उन्हें समाज के उपहास और कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वे कहती हैं, “ऐसा जिंदगी में बहुत बार आता है जब लगता है कि अब हार रहे हैं, लेकिन इसका एक ही तोड़ है—कभी पीछे मुड़कर मत देखिए, हमेशा आगे देखने की कोशिश कीजिए”।
उन्होंने गुजरात के भूकंप जैसी कठिन परिस्थितियों को भी झेला और दिल्ली से झारखंड तक के सफर में परिवारिक जिम्मेदारियों और व्यवसाय के बीच संतुलन बनाने की कला सीखी। उनके लिए सफलता का अर्थ है निरंतर आगे बढ़ते रहना और शिक्षा को हर घर तक पहुँचाना।
भावी अधिकारियों के लिए प्रेरणा
UPSC और सिविल सेवा के छात्रों को प्रेरित करते हुए वे आज के दौर की “लग्जरी लाइफ” और केवल ऑनलाइन पढ़ाई के प्रति बढ़ते रुझान पर चिंता जताती हैं। वे कहती हैं:
संघर्ष का महत्व: “बहुत लग्जरी ज़ोन में रह करके पढ़ाई नहीं होती। अगर आप बेड पर रहिएगा, तो नींद आना स्वाभाविक है”।
प्रतिस्पर्धा की शक्ति: ऑफलाइन क्लासरूम में सैकड़ों छात्रों के बीच रहकर पढ़ाई करने से जो कंपटीशन और डाउट सॉल्व करने का माहौल मिलता है, वह घर के एकांत में संभव नहीं है।
सीख: छात्रों को ‘श्रीकांत’ फिल्म के नायक की तरह चुनौतियों को स्वीकार करना चाहिए और अपना कंफर्ट जोन छोड़ना चाहिए।
एक संकल्प: “हर घर से ऑफिसर”
रीमा जी का विजन बहुत ही स्पष्ट और प्रेरणादायक है—उनका लक्ष्य है कि झारखंड के हर घर से बच्चे शिक्षा से जुड़ें और अधिकारी बनें। वे मानती हैं कि शिक्षा ही सबसे बड़ी जरूरत है, और यदि छात्र सही कोचिंग का चुनाव करें और कड़ी मेहनत करें, तो सफलता निश्चित है।
चाणक्य आईएस एकेडमी का यह संकल्प कि वे आने वाले समय में हजारों और आईएएस अधिकारी तैयार करेंगे, उन सभी युवाओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण है जो प्रशासनिक सेवा में अपना भविष्य देख रहे हैं।
यह लेख उन सभी अभ्यर्थियों के लिए है जो अपने सपनों को सच करने की राह में संघर्ष कर रहे हैं। याद रखिए, आपकी मेहनत ही आपको भीड़ से अलग बनाएगी!
