June 16, 2026

TMC में सबसे बड़ा सियासी भूचाल! 20 सांसदों ने छोड़ा ममता का साथ, नई पार्टी में विलय का ऐलान

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नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। कई दिनों से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपनी पार्टी छोड़ने और नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का औपचारिक ऐलान कर दिया।

इस कदम को तृणमूल कांग्रेस के लिए हाल के वर्षों का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर सांसदों का एक साथ पार्टी से अलग होना राष्ट्रीय राजनीति में दुर्लभ माना जाता है।

सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने अलग गुट बनाने के बजाय एक पंजीकृत राजनीतिक दल में विलय का रास्ता चुना। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से जुड़ी कानूनी जटिलताओं से बचना बताया जा रहा है। कानून के मुताबिक यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई विधायक या सांसद सामूहिक रूप से किसी अन्य दल में विलय का निर्णय लेते हैं, तो उन पर अयोग्यता की कार्रवाई नहीं होती।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ सांसदों का दल बदलना नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में शक्ति संतुलन बदलने वाली घटना साबित हो सकती है। 2026 के बाद के राजनीतिक समीकरणों और आगामी चुनावी रणनीतियों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

दिलचस्प बात यह भी है कि NCPI ने दावा किया है कि अब वह पश्चिम बंगाल से संसद में सबसे बड़ा राजनीतिक समूह बनकर उभरी है। हालांकि इस दावे और उसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर अभी बहस जारी है।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवाल अब और तेज हो सकते हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल एक पार्टी की अंदरूनी कलह नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में नए गठबंधनों और नए समीकरणों की शुरुआत का संकेत भी हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बगावत बंगाल की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है और ममता बनर्जी की पार्टी इस चुनौती का सामना कैसे करती है।

फिलहाल एक बात साफ है—दिल्ली से लेकर कोलकाता तक इस राजनीतिक भूचाल की गूंज सुनाई दे रही है।

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