June 16, 2026

ट्रांसजेंडर कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! देशभर की हाईकोर्टों में चल रही सुनवाई पर लगी रोक, अब सर्वोच्च अदालत करेगी अंतिम सुनवाई

Supreme Court 3

नई दिल्ली: ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े कानून को लेकर देशभर में चल रही कानूनी लड़ाई अब सीधे सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए विभिन्न हाईकोर्टों में लंबित उन याचिकाओं की सुनवाई पर रोक लगा दी है, जिनमें ट्रांसजेंडर कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।

दरअसल, ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन कानून को लेकर कई सामाजिक संगठनों, अधिकार कार्यकर्ताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका कहना है कि कानून के कुछ प्रावधान ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के आत्म-पहचान (Self Identification) के अधिकार को प्रभावित करते हैं, जिसे पहले सुप्रीम कोर्ट अपने ऐतिहासिक NALSA फैसले में मान्यता दे चुका है।

इसी बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि अलग-अलग हाईकोर्टों में चल रही सभी याचिकाओं को एक जगह लाकर सर्वोच्च अदालत में ही सुना जाए, ताकि इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न पर एक समान फैसला आ सके। अदालत ने इस मांग पर सहमति जताते हुए फिलहाल हाईकोर्टों में जारी कार्यवाही पर रोक लगा दी है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहचान, समानता, गरिमा और मौलिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा संवैधानिक सवाल है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने वाले समय में लाखों ट्रांसजेंडर नागरिकों के अधिकारों की दिशा तय कर सकता है।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि संशोधित कानून आत्म-पहचान के सिद्धांत को कमजोर करता है, जबकि केंद्र सरकार का पक्ष है कि कानून का उद्देश्य अधिकारों की रक्षा करना और एक स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करना है। सुप्रीम कोर्ट अब इन सभी दलीलों पर विस्तार से सुनवाई करेगा।

फिलहाल देशभर की निगाहें सर्वोच्च अदालत पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या अदालत ट्रांसजेंडर समुदाय की चिंताओं को स्वीकार करेगी या फिर सरकार के बनाए नए कानूनी ढांचे को बरकरार रखेगी? आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित मामले पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

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