June 16, 2026

107 दिन की जंग के बाद आई राहत! अमेरिका-ईरान समझौते पर बोले मोदी, पश्चिम एशिया में शांति की नई उम्मीद

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नई दिल्ली: दुनिया की निगाहें जिस संघर्ष पर टिकी थीं, उस पर अब शांति की किरण दिखाई देने लगी है। 107 दिनों तक चले तनाव और संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर बनी सहमति का भारत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत इस समझ को सकारात्मक रूप से देखता है और उम्मीद करता है कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन से पूरे क्षेत्र में शांति बहाल होगी। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद आवश्यक है।

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच चला यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं था। इसके कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा गया था। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, व्यापारिक अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता ने कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी थीं। ऐसे में युद्ध समाप्त करने की दिशा में हुई यह पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राहत मानी जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने का समझौता अंतिम रूप ले चुका है। जानकारी के अनुसार, इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस समझौते की पुष्टि की है।

भारत लंबे समय से संवाद और कूटनीतिक समाधान का समर्थक रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया को भी उसी नीति का विस्तार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो न केवल पश्चिम एशिया में स्थिरता आएगी, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी बड़ी राहत मिलेगी।

अब पूरी दुनिया की नजर 19 जून पर टिकी है, जब यह समझौता औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित होगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह हाल के वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण शांति समझौतों में से एक साबित हो सकता है।

फिलहाल सवाल यही है — क्या यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का रास्ता खोलेगा, या आने वाले दिनों में नई चुनौतियां सामने आएंगी?

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