14 साल की उम्र में शुरू की थी कोडिंग, 25 की उम्र में बेच दी 60 अरब डॉलर की कंपनी! जानिए कौन हैं भारतीय मूल के अमन सांगर
MIT से SpaceX तक का सफर, AI की दुनिया में भारतीय मूल के युवा ने रचा इतिहास
महज 25 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर अमन सांगर ने न सिर्फ सिलिकॉन वैली बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
14 साल की उम्र में लिखी पहली कोड लाइन
न्यूयॉर्क में पले-बढ़े अमन सांगर के परिवार की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। उनके पिता अरविंद सांगर IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं, जबकि उनकी मां शिल्पा सांगर एक सफल उद्यमी और ऑर्थोडॉन्टिस्ट हैं।
बताया जाता है कि अमन ने मात्र 14 साल की उम्र में कोडिंग शुरू कर दी थी। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति उनका जुनून उन्हें दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक MIT तक ले गया, जहां उनकी मुलाकात उन दोस्तों से हुई जो आगे चलकर Cursor के सह-संस्थापक बने।
जब एक असफलता ने बदल दी किस्मत
2022 में अमन और उनकी टीम ने शुरुआत में इंजीनियरिंग डिज़ाइन के लिए AI मॉडल बनाने की कोशिश की, लेकिन यह प्रोजेक्ट सफल नहीं हो पाया। हालांकि टीम ने हार नहीं मानी और अपना फोकस सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर शिफ्ट कर दिया।
यहीं से जन्म हुआ Cursor का — एक ऐसा AI प्लेटफॉर्म जो सिर्फ कोड ऑटो-कम्प्लीट नहीं करता, बल्कि पूरे कोडबेस को समझकर डेवलपर्स को सुझाव देता है, गलतियां पकड़ता है और जटिल प्रोग्रामिंग समस्याओं का समाधान भी तैयार करता है।
आज दुनिया की बड़ी कंपनियां कर रही हैं इस्तेमाल
Cursor की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका इस्तेमाल Nvidia, Adobe, Uber, Shopify और PayPal जैसी दिग्गज कंपनियों की टीमें कर रही हैं।
कंपनी के अनुसार, उसके AI टूल्स हर दिन 10 करोड़ से अधिक लाइनों का कोड लिखने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं, Fortune 500 कंपनियों में से 64 प्रतिशत किसी न किसी रूप में Cursor की तकनीक का उपयोग कर रही हैं।
SpaceX को क्यों पसंद आई Cursor?
AI अब केवल चैटबॉट तक सीमित नहीं है। भविष्य की तकनीक, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष अनुसंधान और ऑटोमेशन में AI की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में Cursor जैसी उन्नत कोडिंग तकनीक SpaceX के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह अधिग्रहण SpaceX की AI क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
भारतीय युवाओं के लिए बड़ा संदेश
अमन सांगर की कहानी यह साबित करती है कि आज के दौर में उम्र नहीं, बल्कि विचार और नवाचार सफलता तय करते हैं। एक किशोर प्रोग्रामर से लेकर अरबों डॉलर की कंपनी बनाने तक का उनका सफर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो तकनीक और स्टार्टअप की दुनिया में बड़ा सपना देख रहे हैं।
बॉटम लाइन
14 साल की उम्र में शुरू हुई कोडिंग की यात्रा आज 60 अरब डॉलर की डील तक पहुंच चुकी है। अमन सांगर का नाम अब उन भारतीय मूल के टेक उद्यमियों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने वैश्विक तकनीकी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। और अगर यह सौदा तय समय पर पूरा हो जाता है, तो यह AI उद्योग के सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक माना जाएगा।
