रक्षा क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक छलांग! 5 साल में दोगुना हुआ डिफेंस प्रोडक्शन, 1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड ने दुनिया को चौंकाया
आत्मनिर्भर भारत की ताकत का नया अध्याय, रक्षा उत्पादन में 110% उछाल; स्वदेशी हथियारों से मजबूत हो रही सेना
आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास तक का सफर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि भारत की बदलती रणनीतिक सोच का संकेत भी है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने स्वदेशी रक्षा उपकरणों, आधुनिक तकनीक और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर लगातार जोर दिया है। इसका परिणाम अब उत्पादन और क्षमता दोनों में दिखाई दे रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि नवाचार, तकनीक और स्वदेशी निर्माण ने भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
सरकारी उपक्रमों के साथ निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका
रक्षा उत्पादन में अभी भी सरकारी कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, लेकिन निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। कुल उत्पादन में सरकारी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान बढ़कर 24 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह संकेत देता है कि भारत का रक्षा उद्योग धीरे-धीरे अधिक प्रतिस्पर्धी और आधुनिक बन रहा है।
राजनाथ सिंह ने गिनाईं बड़ी उपलब्धियां
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव देखे हैं। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन ने सेना को आधुनिक बनाने के साथ-साथ जमीन, समुद्र, हवा, साइबर और अंतरिक्ष जैसे सभी रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की तैयारी को मजबूत किया है।
क्या बदल रहा है भारत?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि वैश्विक रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। स्वदेशी मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, युद्धपोत, लड़ाकू विमान और अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों पर बढ़ता निवेश इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
बड़ा संदेश
1.78 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की रणनीतिक ताकत, तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में यदि यही रफ्तार जारी रहती है, तो भारत दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्माण केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
