July 1, 2026

30 दिन हिरासत में रहे तो मंत्री पद जाएगा? बड़ा फैसला 17 जुलाई को!

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संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) 17 जुलाई को उस बहुचर्चित संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पर अपनी रिपोर्ट अपनाने की तैयारी में है, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत किसी भी मंत्री को गंभीर अपराध में लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान किया गया है। इस प्रस्ताव ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है और मानसून सत्र में इसे पेश किए जाने की संभावना है।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, यदि किसी मंत्री पर ऐसे अपराध का आरोप हो, जिसकी सजा पांच वर्ष या उससे अधिक हो, और वह लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहे, तो 31वें दिन उसका पद स्वतः समाप्त हो सकता है। राष्ट्रपति या राज्यपाल भी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की सलाह पर संबंधित मंत्री को पद से हटा सकेंगे। सरकार का तर्क है कि 30 दिनों के भीतर जमानत के लिए कई अवसर उपलब्ध होते हैं, इसलिए यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है।

हालांकि, विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकतांत्रिक मूल्यों, संघीय ढांचे और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया है। विपक्ष का कहना है कि केवल गिरफ्तारी और हिरासत के आधार पर किसी जनप्रतिनिधि को पद से हटाना उचित नहीं है, क्योंकि दोष सिद्ध होने से पहले सजा जैसी स्थिति बन जाएगी। जेपीसी में शामिल विपक्षी सदस्य रिपोर्ट पर असहमति नोट (डिसेंट नोट) भी दर्ज करा सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, समिति कानून के संभावित राजनीतिक दुरुपयोग को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान जोड़ने की सिफारिश कर सकती है। साथ ही यह भी सुझाव दिया जा सकता है कि यह कानून केवल गंभीर और सीमित श्रेणी के अपराधों पर ही लागू हो। यदि जेपीसी रिपोर्ट को मंजूरी देती है, तो संसद के मानसून सत्र में इस विधेयक पर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।

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