June 19, 2026

63 साल पुराने लड़ाकू विमान को जिंदा रखने की जंग! ब्रिटेन से फिर आ रहे Jaguar, जानिए क्यों मजबूर है भारत

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नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना (IAF) अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद स्ट्राइक फाइटर जेट Jaguar को उड़ान में बनाए रखने के लिए एक बार फिर ब्रिटेन का सहारा लेने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत जल्द ही ब्रिटेन से रिटायर हो चुके नौ Jaguar लड़ाकू विमान हासिल करेगा। हालांकि ये विमान युद्ध के लिए नहीं, बल्कि इनके पुर्जों और महत्वपूर्ण उपकरणों को निकालकर भारतीय वायुसेना के मौजूदा Jaguar बेड़े को लंबे समय तक संचालित रखने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे।

Jaguar को भारतीय वायुसेना में 1979 में शामिल किया गया था और आज भी यह देश की सबसे महत्वपूर्ण स्ट्राइक क्षमताओं में गिना जाता है। लेकिन समय के साथ इसके लिए स्पेयर पार्ट्स जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य देशों ने वर्षों पहले ही इस विमान को सेवा से हटा दिया था। ऐसे में भारत दुनिया का आखिरी देश बन गया है जो अभी भी Jaguar का संचालन कर रहा है। इसी वजह से वायुसेना को पुराने विमानों को खरीदकर उनके उपयोगी हिस्सों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Jaguar भले ही उम्रदराज़ हो चुका हो, लेकिन इसके आधुनिक DARIN-III अपग्रेड, अत्याधुनिक रडार और लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता इसे अब भी प्रासंगिक बनाती है। समुद्री हमलों से लेकर रणनीतिक मिशनों तक, यह विमान भारतीय वायुसेना की ताकत का अहम हिस्सा बना हुआ है। हालांकि इसके इंजन और रखरखाव को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, और पिछले वर्षों में कई दुर्घटनाएं भी सामने आई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय वायुसेना के सामने खड़े बड़े सवाल को फिर उजागर कर दिया है—क्या भारत अपने पुराने लड़ाकू विमानों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो गया है? वायुसेना की लड़ाकू स्क्वाड्रन संख्या पहले ही स्वीकृत 42 के मुकाबले करीब 29-30 तक सिमट चुकी है। ऐसे में नए विमानों की खरीद में देरी और पुराने प्लेटफॉर्म पर बढ़ती निर्भरता आने वाले वर्षों में देश की हवाई शक्ति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। फिलहाल Jaguar को 2030 के बाद भी उड़ान में बनाए रखने की तैयारी इस बात का संकेत है कि यह “शमशेर” अभी रिटायर होने के मूड में नहीं है।