अब धूप नहीं रोक पाएगी ड्यूटी! सरायकेला ट्रैफिक पुलिस को मिली ‘कूलिंग जैकेट’, गर्मी में भी रहेंगे फिट
45 डिग्री की तपिश में हाईटेक सहारा, ट्रैफिक जवानों के लिए शुरू हुई नई पहल
गर्मी के मौसम में जब तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब सड़क पर घंटों खड़े रहकर ट्रैफिक संभालना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में यह नई व्यवस्था जवानों के लिए राहत की ठंडी हवा लेकर आई है।
क्या है कूलिंग जैकेट की खासियत?
यह कोई सामान्य जैकेट नहीं है। इसके अंदर छोटे इनबिल्ट फैन लगे होते हैं, जो लगातार हवा का प्रवाह बनाए रखते हैं। इससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और पसीने व गर्मी का असर काफी कम हो जाता है।
जैकेट को पावर बैंक से भी चलाया जा सकता है और एक बार चार्ज होने के बाद यह कई घंटों तक काम करती है। इसके अलावा इसमें धूप से सुरक्षा देने वाला विशेष कपड़ा और रात में दृश्यता बढ़ाने के लिए रिफ्लेक्टिव स्ट्रिप्स भी लगी होती हैं।
सिर्फ सुविधा नहीं, स्वास्थ्य की सुरक्षा भी
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार तेज धूप में खड़े रहने से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ट्रैफिक पुलिसकर्मी सबसे अधिक जोखिम वाले वर्गों में शामिल हैं क्योंकि उनकी ड्यूटी सीधे खुले वातावरण में होती है।
ऐसे में कूलिंग जैकेट केवल सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
झारखंड में बढ़ रही स्मार्ट पुलिसिंग
पिछले कुछ समय से झारखंड में पुलिसिंग को तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। कूलिंग जैकेट की यह पहल भी उसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है, जहां जवानों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि सड़क पर दिनभर खड़े रहने वाले ट्रैफिक जवानों को ऐसी सुविधाएं मिलनी ही चाहिए।
तपती गर्मी में राहत की ठंडी हवा
जहां आम लोग दोपहर की धूप से बचने के लिए घरों में रहना पसंद करते हैं, वहीं ट्रैफिक जवान शहर की रफ्तार बनाए रखने के लिए चौराहों पर डटे रहते हैं। ऐसे में कूलिंग जैकेट उनके लिए किसी ‘चलते-फिरते एयर कंडीशनर’ से कम नहीं है।
सरायकेला की यह पहल सिर्फ एक जैकेट की कहानी नहीं, बल्कि उन जवानों के सम्मान की कहानी है जो हर मौसम में सड़क पर खड़े होकर हमारी सुरक्षा और व्यवस्था संभालते हैं।
