अंधेरे से उजाले की ओर फिर बढ़ा कदम! विधायक सरयू राय ने किया दिव्यज्योति नेत्रहीन संस्थान का पुनः उद्घाटन
सिर्फ एक भवन नहीं, सैकड़ों सपनों को मिला नया सहारा; दिव्यांग बच्चों के भविष्य को लेकर दिखी नई उम्मीद
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के विकास, सुविधाओं के विस्तार और नेत्रहीन विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। उपस्थित लोगों ने इस पहल को समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
शिक्षा ही बनेगी सबसे बड़ी ताकत
दिव्यज्योति नेत्रहीन संस्थान लंबे समय से दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षा, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता की राह दिखाने का काम कर रहा है। यहां बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि जीवन कौशल और आत्मविश्वास भी सिखाया जाता है, ताकि वे समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
पुनः उद्घाटन के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि संस्थान की गतिविधियों को और गति मिलेगी तथा अधिक से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों तक इसका लाभ पहुंचेगा।
सरयू राय ने क्या कहा?
कार्यक्रम में विधायक सरयू राय ने कहा कि समाज की असली प्रगति तब मानी जाएगी जब हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। उन्होंने शिक्षा और सामाजिक सहयोग को दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम बताया।उन्होंने संस्थान के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करते हैं और जरूरतमंद बच्चों को नई दिशा देते हैं।
भावुक कर देने वाला माहौल
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की प्रतिभा, उनका आत्मविश्वास और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। कई लोगों ने कहा कि इन बच्चों की इच्छाशक्ति किसी प्रेरणा से कम नहीं है।संस्थान से जुड़े लोगों का मानना है कि बेहतर संसाधन और सामाजिक सहयोग मिलने पर दृष्टिबाधित बच्चे भी हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते हैं।
समाज के लिए एक प्रेरक संदेश
दिव्यज्योति नेत्रहीन संस्थान का पुनः उद्घाटन केवल एक भवन के दरवाजे खुलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन सपनों के फिर से जागने की कहानी है जिन्हें कभी परिस्थितियों ने रोकने की कोशिश की थी।जमशेदपुर में हुई यह पहल एक बार फिर याद दिलाती है कि रोशनी केवल आंखों से नहीं, बल्कि शिक्षा, आत्मविश्वास और अवसरों से भी आती है।
