AI में भारत अभी पीछे, लेकिन रफ्तार सही दिशा में: गूगल X के सह-संस्थापक
सेबेस्टियन थ्रुन बोले— 20 साल पहले भारत ज्यादा भ्रष्ट और धीमा था, अब बदलाव दिख रहा है, लेकिन AI की दौड़ में अमेरिका और चीन अभी काफी आगे हैं।
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में आयोजित South Summit 2026 के दौरान बातचीत में थ्रुन ने कहा कि आज का भारत 20 साल पहले वाले भारत से बिल्कुल अलग है। उनके मुताबिक, पहले भारत में भ्रष्टाचार अधिक था और वैश्विक बाजार की चुनौतियों का जवाब देने की क्षमता सीमित थी, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है।
थ्रुन ने कहा कि किसी भी देश की सफलता केवल तकनीक पर निर्भर नहीं करती। बेहतर शिक्षा व्यवस्था, निवेश की उपलब्धता, कारोबार को बढ़ावा देने वाली नीतियां, मजबूत कानून व्यवस्था और पारदर्शी शासन जैसे कई कारक मिलकर विकास की गति तय करते हैं। उनका मानना है कि भारत इन क्षेत्रों में सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसी वजह से भविष्य को लेकर वे आशावादी हैं।
हालांकि उन्होंने साफ कहा कि AI के मामले में भारत अभी अमेरिका और चीन से काफी पीछे है। उनके अनुसार, यदि भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है तो शिक्षा, वित्तीय समर्थन, नवाचार और सुशासन जैसे सभी पहलुओं को एक साथ मजबूत करना होगा।
AI के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए थ्रुन ने डीपफेक और फेक न्यूज को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि आज AI ऐसी तस्वीरें और वीडियो तैयार कर सकता है जिन्हें असली और नकली में पहचानना बेहद मुश्किल हो गया है। यदि इस तकनीक का दुरुपयोग हुआ तो चुनावों, शेयर बाजारों और समाज पर गंभीर असर पड़ सकता है।
नौकरियों पर AI के प्रभाव को लेकर भी उन्होंने दिलचस्प टिप्पणी की। थ्रुन का मानना है कि डॉक्टरों, वकीलों और अन्य विशेषज्ञ पेशों में होने वाले कई दोहराव वाले और अत्यधिक सटीक कार्य अब AI मशीनें बेहतर ढंग से कर सकती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इंसानों की जरूरत खत्म हो जाएगी। उनके अनुसार, भविष्य में इंसानों की भूमिका अधिक रचनात्मक, व्यापक और नवाचार आधारित कार्यों में बढ़ेगी।
थ्रुन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत AI, सेमीकंडक्टर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि मौजूदा गति बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक AI परिदृश्य में कहीं अधिक मजबूत भूमिका निभा सकता है।
