June 5, 2026

नेट-जीरो की राह पर टाटा स्टील, पर्यावरण बचाने का बड़ा ब्लूप्रिंट

Screenshot_20260604_182429_Chrome

जमशेदपुर: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर टाटा स्टील ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उद्योग और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि साथ-साथ चलने वाले साथी हैं। कंपनी ने अपने नेट-जीरो और डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन में कमी) के रोडमैप को आगे बढ़ाते हुए हरित भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

तेजी से बदलते वैश्विक पर्यावरणीय परिदृश्य के बीच टाटा स्टील उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में शामिल है, जो उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में भी बड़े कदम उठा रही हैं। कंपनी स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, कार्बन कैप्चर तकनीक और नई ग्रीन स्टील तकनीकों पर लगातार निवेश कर रही है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कंपनी ने यह संदेश दिया कि आने वाला दौर केवल उत्पादन बढ़ाने का नहीं, बल्कि जिम्मेदार और टिकाऊ विकास का होगा। इसी सोच के तहत टाटा स्टील ने अपने विभिन्न संयंत्रों में जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, हरित आवरण बढ़ाने और कार्बन फुटप्रिंट कम करने की दिशा में कई पहलें तेज की हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील उद्योग को अक्सर प्रदूषण से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन नई तकनीकों और हरित नवाचारों के जरिए यह क्षेत्र अब पर्यावरण संरक्षण का भी महत्वपूर्ण भागीदार बन रहा है। टाटा स्टील का नेट-जीरो लक्ष्य इसी बदलाव की एक बड़ी मिसाल माना जा रहा है।

जमशेदपुर से दुनिया तक अपनी पहचान बना चुकी टाटा स्टील अब केवल स्टील उत्पादन में ही नहीं, बल्कि हरित और टिकाऊ औद्योगिक विकास के मॉडल के रूप में भी खुद को स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।