एक तरफ भारतीय रेलवे अमृत भारत योजना के तहत स्टेशनों को आधुनिक बनाने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ जमशेदपुर के सलगाझुरी वेस्ट केबिन हॉल्ट के लोग बुनियादी रेल सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर स्टेशन का विकास तो किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी मांग — ट्रेनों के ठहराव — अब तक अधूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेशन का निर्माण और सौंदर्यीकरण होने के बावजूद यहां प्रमुख ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से यात्रियों को कोई खास फायदा नहीं मिल पा रहा। रोजाना नौकरी, पढ़ाई और जरूरी कामों के लिए सफर करने वाले लोगों को टाटानगर या दूसरे स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
इलाके के लोगों का आरोप है कि कई बार रेलवे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि अगर यहां कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों का स्टॉपेज मिल जाए, तो हजारों यात्रियों को राहत मिल सकती है।
सलगाझुरी और आसपास के इलाकों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब स्टेशन को अमृत भारत योजना में शामिल किया गया, तो यात्रियों की वास्तविक जरूरतों को क्यों नजरअंदाज किया गया?
यात्रियों का कहना है कि सिर्फ स्टेशन की इमारत चमकाने से काम नहीं चलेगा। असली जरूरत ट्रेनों के ठहराव, बेहतर कनेक्टिविटी और नियमित सुविधाओं की है। कई लोगों ने यह भी कहा कि स्टेशन बनने के बाद उम्मीद थी कि इलाके का विकास होगा, लेकिन अब लोगों में निराशा बढ़ती जा रही है।
फिलहाल, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने रेलवे से जल्द कार्रवाई की मांग की है। लोगों का साफ कहना है कि अगर स्टेशन है, तो वहां ट्रेनें भी रुकनी चाहिए — वरना करोड़ों की परियोजना सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगी।