भारत ने रचा इतिहास, पहुंचा माइनस 269°C तक
भारत ने क्वांटम कंप्यूटिंग की दौड़ में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ऐसा तापमान प्राप्त कर लिया है, जो देश के वैज्ञानिक अनुसंधान इतिहास के सबसे ठंडे स्तरों में से एक माना जा रहा है। आंध्र प्रदेश के अमरावती स्थित क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी में स्वदेशी डायल्यूशन रेफ्रिजरेटर की मदद से 4 केल्विन यानी लगभग माइनस 269 डिग्री सेल्सियस तापमान हासिल किया गया है। खास बात यह है कि इस तकनीक में 80 प्रतिशत से अधिक पुर्जे और घटक भारत में ही विकसित किए गए हैं।
पिछले वर्ष वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों ने राज्य सरकार को बताया था कि क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए आवश्यक लगभग 85 प्रतिशत हार्डवेयर भारत में विकसित किया जा सकता है। इसी दृष्टि के तहत “Made in Amaravati for the World” विजन को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद क्वांटम हार्डवेयर सप्लाई चेन को मजबूत करने और क्रायोजेनिक तकनीकों के विकास के लिए कई संस्थानों और कंपनियों के साथ साझेदारी की गई। अप्रैल 2026 में अमरावती और एसआरएम यूनिवर्सिटी में देश की पहली क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटीज स्थापित की गई थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत को वैश्विक क्वांटम तकनीक मानचित्र पर मजबूत पहचान दिला सकती है। क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी अब एक राष्ट्रीय परीक्षण मंच के रूप में काम करेगी, जहां स्वदेशी क्वांटम प्रोसेसर, कंट्रोल सिस्टम, सॉफ्टवेयर और अन्य महत्वपूर्ण हार्डवेयर का परीक्षण और सत्यापन किया जाएगा। ऐसे समय में जब दुनिया क्वांटम कंप्यूटिंग को भविष्य की सबसे क्रांतिकारी तकनीक मान रही है, भारत का यह कदम तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक नवाचार की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
