जिसने शरणार्थियों को बचाया, देश को दे दी 300 एकड़ जमीन
भारत के विभाजन के बाद जब लाखों लोग बेघर होकर नई जिंदगी की तलाश में भटक रहे थे, तब एक उद्योगपति ने अपने निजी विमानों को मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के लिए इस्तेमाल किया। तमिलनाडु के प्रसिद्ध उद्योगपति और पद्म भूषण सम्मानित डॉ. आर.एम. अलागप्पा चेट्टियार ने पाकिस्तान से भारत आने वाले शरणार्थियों को सुरक्षित पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि व्यापारिक सफलता को राष्ट्र निर्माण के लिए कैसे समर्पित किया जा सकता है।
शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान भी असाधारण रहा। उन्होंने भारत सरकार को 300 एकड़ भूमि और 15 लाख रुपये दान दिए, जिसकी बदौलत कराईकुडी में सेंट्रल इलेक्ट्रोकेमिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CECRI) की स्थापना संभव हो सकी। इसके अलावा उन्होंने कई स्कूलों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और बाद में स्थापित अलागप्पा विश्वविद्यालय की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि स्थायी बदलाव केवल संस्थानों के निर्माण से ही संभव है।
डॉ. अलागप्पा चेट्टियार को 1957 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया, लेकिन उसी वर्ष मात्र 48 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। हालांकि उनका जीवन छोटा रहा, लेकिन उनकी विरासत आज भी लाखों छात्रों, वैज्ञानिकों और नागरिकों को प्रेरित करती है। उन्होंने साबित किया कि सच्ची सफलता केवल संपत्ति बनाने में नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को कुछ लौटाने में है।
