June 22, 2026

जिसने शरणार्थियों को बचाया, देश को दे दी 300 एकड़ जमीन

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भारत के विभाजन के बाद जब लाखों लोग बेघर होकर नई जिंदगी की तलाश में भटक रहे थे, तब एक उद्योगपति ने अपने निजी विमानों को मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के लिए इस्तेमाल किया। तमिलनाडु के प्रसिद्ध उद्योगपति और पद्म भूषण सम्मानित डॉ. आर.एम. अलागप्पा चेट्टियार ने पाकिस्तान से भारत आने वाले शरणार्थियों को सुरक्षित पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि व्यापारिक सफलता को राष्ट्र निर्माण के लिए कैसे समर्पित किया जा सकता है।

1909 में तमिलनाडु के चेत्तिनाड क्षेत्र में जन्मे अलागप्पा चेट्टियार ने कानून की पढ़ाई करने के बाद व्यवसाय की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने वस्त्र उद्योग, रबर बागान, बीमा, होटल, सिनेमा और विमानन जैसे कई क्षेत्रों में अपना साम्राज्य खड़ा किया। लेकिन उन्हें सिर्फ एक सफल उद्योगपति के रूप में नहीं, बल्कि समाजसेवी और दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माता के रूप में भी याद किया जाता है। 1947 के विभाजन के दौरान उनकी एयरलाइन ‘ज्यूपिटर एयरवेज’ ने शरणार्थियों, सैन्य कर्मियों और आवश्यक सामान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।

शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान भी असाधारण रहा। उन्होंने भारत सरकार को 300 एकड़ भूमि और 15 लाख रुपये दान दिए, जिसकी बदौलत कराईकुडी में सेंट्रल इलेक्ट्रोकेमिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CECRI) की स्थापना संभव हो सकी। इसके अलावा उन्होंने कई स्कूलों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और बाद में स्थापित अलागप्पा विश्वविद्यालय की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि स्थायी बदलाव केवल संस्थानों के निर्माण से ही संभव है।

डॉ. अलागप्पा चेट्टियार को 1957 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया, लेकिन उसी वर्ष मात्र 48 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। हालांकि उनका जीवन छोटा रहा, लेकिन उनकी विरासत आज भी लाखों छात्रों, वैज्ञानिकों और नागरिकों को प्रेरित करती है। उन्होंने साबित किया कि सच्ची सफलता केवल संपत्ति बनाने में नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को कुछ लौटाने में है।