पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम : बंगाल में सत्ता परिवर्तन के पीछे कई वजहें
नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के परिणामों ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. मतगणना के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक इन नतीजों के मायने तलाशने में जुट गए हैं. इस बार के परिणाम कई मायनों में चौंकाने वाले हैं—कहीं सत्ता परिवर्तन, कहीं नए चेहरों का उदय, तो कहीं पुराने किलों का ढहना साफ दिखाई दे रहा है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को इस बार बड़ा झटका लगा है. करीब 15 साल सत्ता में रहने के बाद एंटी-इनकंबेंसी, कानून-व्यवस्था पर सवाल और भ्रष्टाचार के आरोप जैसे मुद्दे भारी पड़े. वहीं नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने आक्रामक रणनीति अपनाई. मजबूत संगठन, बूथ मैनेजमेंट और केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रचार ने बीजेपी को बढ़त दिलाई. नतीजों से साफ है कि बंगाल में सत्ता संतुलन बदल चुका है.
तमिलनाडु में विजय का जलवा, स्टालिन को बड़ा झटका
विजय ने राजनीति में कदम रखते ही बड़ा उलटफेर कर दिया. उनकी लोकप्रियता सिर्फ फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसे उन्होंने राजनीतिक समर्थन में बदल दिया. एम के स्टालिन की अगुवाईवाली डीएमके को करारी हार का सामना करना पड़ा. जनता के बीच बदलाव की चाह और एंटी-इनकंबेंसी का फायदा विजय को मिला. उन्होंने खुद को एक फुल-टाइम नेता के रूप में स्थापित किया.
असम में हिमंता सरमा का दबदबा बरकरार
हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित की. उनकी रणनीति ने चुनाव को भावनात्मक और पहचान आधारित मुद्दों पर केंद्रित कर दिया. राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने कोशिश जरूर की, लेकिन संगठन और रणनीति में कमी साफ नजर आई. स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरा न होना और वोटों का बंटवारा भी हार का बड़ा कारण बना.
केरल में कांग्रेस की वापसी, वाम मोर्चा सत्ता से बाहर
केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने शानदार वापसी करते हुए लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को सत्ता से बाहर कर दिया. करीब एक दशक बाद कांग्रेस गठबंधन की यह जीत एंटी-इनकंबेंसी और जनता की नाराजगी का नतीजा मानी जा रही है. हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री पद को लेकर है, जिस पर कांग्रेस के भीतर मंथन जारी है.
पुडुचेरी में एनडीए की वापसी, कांग्रेस फिर पिछड़ी
पुडुचेरी में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स (एनडीए) ने फिर से सत्ता में वापसी की है. एन रंगास्वामी का स्थानीय प्रभाव और बीजेपी का संगठनात्मक समर्थन एनडीए के पक्ष में गया. कांग्रेस यहां भी तालमेल की कमी और कमजोर रणनीति के कारण पिछड़ गई. बीजेपी ने गठबंधन राजनीति और स्थानीय समीकरणों को साधते हुए अपनी स्थिति मजबूत कर ली.