Big security initiative in West Bengal: पश्चिम बंगाल में बड़ी सुरक्षा पहल: सुवेंदु सरकार ने BSF को दी जमीन; घुसपैठियों को पकड़कर सीधे सुरक्षा बलों को सौंपेगी पुलिस
सर्च न्यूज: सच के साथ: पश्चिम बंगाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 27 किलोमीटर लंबी जमीन का टुकड़ा सौंप दिया है। नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य कैबिनेट की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए आगे भी जहां कहीं भी जमीन की आवश्यकता होगी, राज्य सरकार उसे तुरंत उपलब्ध कराएगी ताकि फेंसिंग (बाड़बंदी) के काम को बिना किसी रुकावट के जल्द पूरा किया जा सके।
यह कदम राज्य की सीमा सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के एक बड़े अभियान की शुरुआत है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2,216 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जो देश की सबसे लंबी स्टेट बॉर्डर है। इस कुल सीमा में से करीब 1,600 किलोमीटर के हिस्से में बाड़ लगाई जा चुकी है, जबकि लगभग 600 किलोमीटर का सीमावर्ती इलाका अभी भी बिना फेंसिंग के खुला हुआ है। इस खाली हिस्से के कारण घुसपैठ और तस्करी की समस्या बनी रहती थी, जिसे दूर करने के लिए ही जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई है।मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता में हुई एक उच्च स्तरीय समन्वय बैठक के दौरान पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने “वोट बैंक की राजनीति और तुष्टीकरण” के चलते बीएसएफ (BSF) को आवश्यक जमीन देने से इनकार कर दिया था, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी। इसके साथ ही उन्होंने खुलासा किया कि पिछले कई सालों से सीमावर्ती जिलों में जिला प्रशासन, राज्य पुलिस और बीएसएफ के बीच होने वाली महत्वपूर्ण समन्वय बैठकें बंद पड़ी थीं, जिन्हें अब नए सिरे से नियमित तौर पर शुरू कर दिया गया है।
अवैध घुसपैठ की समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने नई नीति की घोषणा की कि अब राज्य पुलिस पकड़े गए घुसपैठियों को सीधे बीएसएफ (BSF) के हवाले करेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे और तय मानकों में नहीं आने वाले सभी अवैध नागरिकों को घुसपैठिया माना जाएगा और कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस डिपोर्ट किया जाएगा। इस फैसले के बाद राज्य के गृह और राजस्व विभाग के अधिकारियों को अगले दो हफ्तों के भीतर जमीन का भौतिक कब्जा सुरक्षा बलों को सौंपने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।