कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम आतंकी हमले को लेकर NIA की चार्जशीट में कई ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, अगर स्थानीय गाइड समय रहते सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दे देते, तो शायद 26 बेगुनाह पर्यटकों की जान बचाई जा सकती थी।
चार्जशीट के अनुसार, हमले से एक दिन पहले तीन संदिग्ध आतंकी पहलगाम इलाके में घूमते दिखाई दिए थे। उन्होंने स्थानीय गाइडों परवेज और बशीर अहमद से संपर्क किया और सुरक्षित ठिकाने की मांग की। जांच में सामने आया कि दोनों ने आतंकियों को न सिर्फ अपनी झोपड़ी में शरण दी, बल्कि उन्हें खाना, पानी और जरूरी सामान भी उपलब्ध कराया।
NIA के मुताबिक, आतंकियों के पास हथियारों से भरे बैग थे और उनका हुलिया देखकर साफ समझा जा सकता था कि वे किसी बड़े मिशन पर हैं। इसके बावजूद किसी ने पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को सूचना नहीं दी। बताया जा रहा है कि आतंकी करीब पांच घंटे तक वहां रुके और इसी दौरान उन्होंने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था, अमरनाथ यात्रा और फोर्सेज की मूवमेंट से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाईं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हमले वाले दिन भी दोनों गाइडों ने उन्हीं आतंकियों को इलाके में देखा था, लेकिन फिर भी चुप्पी साधे रहे। कुछ ही देर बाद बैसरन घाटी गोलियों और चीखों से गूंज उठी।
चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि आतंकियों ने जाते समय गाइडों को पैसे दिए थे। अब NIA इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि क्या इस साजिश में और लोग भी शामिल थे।
इस खुलासे के बाद कश्मीर में पर्यटन सुरक्षा और स्थानीय नेटवर्क की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देशभर में लोग पूछ रहे हैं — अगर समय रहते एक सूचना दे दी जाती, तो क्या 26 जिंदगियां बच सकती थीं?