बिहार में हर 36 मिनट पर गायब हो रहा एक बच्चा!
बिहार में बच्चों की गुमशुदगी अब एक गंभीर सामाजिक और मानवीय संकट का रूप ले चुकी है। वर्ष 2025 में राज्य से 14,699 बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए, यानी औसतन हर 36 मिनट में एक बच्चा गायब हुआ। चिंताजनक बात यह है कि इनमें 85 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं। यह आंकड़ा केवल अपराध का नहीं, बल्कि समाज और सुरक्षा व्यवस्था के सामने खड़े बड़े सवालों का संकेत भी देता है।
बाल अधिकार संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि मानव तस्करी, बाल विवाह, बाल श्रम और सामाजिक-आर्थिक कमजोरियां इस संकट के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। लड़कियों की अधिक संख्या यह संकेत देती है कि वे कई तरह के शोषण और अपराधों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। यही वजह है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाएं इस मुद्दे पर लगातार चिंता जता रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बच्चों की बरामदगी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुमशुदगी के मूल कारणों पर भी सख्ती से काम करने की जरूरत है। जागरूकता अभियान, बेहतर पुलिस निगरानी, तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई और कमजोर परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना समय की मांग बन चुका है। बिहार के ये आंकड़े सिर्फ एक राज्य की कहानी नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरे देश के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं।
