बकरीद से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क पर नमाज और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर दिए गए निर्देशों के बाद सहारनपुर में मुस्लिम समुदाय की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
स्थानीय मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ईद या बकरीद पर आमतौर पर सड़क पर नमाज पढ़ने की परंपरा नहीं होती, फिर भी हर साल इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उछाला जाता है। लोगों ने सवाल उठाया कि अगर कहीं कुछ मिनटों के लिए सड़क पर नमाज पढ़ भी ली जाए तो उसे इतना बड़ा मुद्दा क्यों बनाया जाता है।
इस बयान के बाद इलाके में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कुछ लोग सरकार के फैसले को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बता रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर विरोध करने वाले इसे “राजनीतिक स्टंट” और एक खास समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश बता रहे हैं।
सहारनपुर के कई लोगों ने यह भी कहा कि प्रशासन को त्योहारों के दौरान सहयोग और शांति का माहौल बनाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, न कि ऐसे बयानों से तनाव बढ़ाने पर। वहीं पशु कटान और त्योहारों से जुड़े अन्य नियमों को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थलों को लेकर होने वाली बहसें अब सिर्फ प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि ये चुनावी और सामाजिक राजनीति का बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं।
फिलहाल बकरीद से पहले सहारनपुर समेत कई इलाकों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है और शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। लेकिन इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक कितनी तेजी से माहौल गर्म कर सकते हैं।