देशभर में CBSE परीक्षा परिणाम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कई छात्रों और अभिभावकों ने रिजल्ट में भारी गड़बड़ी, नंबरों में असमानता और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया से लेकर छात्र संगठनों तक, हर जगह इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी कंपनी COEMPT को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आने लगे हैं।
आरोप लगाया जा रहा है कि जिस कंपनी को CBSE परीक्षा प्रक्रिया की जिम्मेदारी दी गई, उसका पुराना रिकॉर्ड विवादों से जुड़ा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यही कंपनी पहले Globarena नाम से तेलंगाना में भी विवादों में घिर चुकी थी। अब नाम बदलकर COEMPT होने के बावजूद उसे इतने बड़े स्तर पर जिम्मेदारी कैसे दे दी गई, इसे लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों का कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई छात्रों के नंबर उम्मीद से बेहद कम आए हैं, जबकि कुछ मामलों में रिजल्ट और आंतरिक प्रदर्शन के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है। इससे छात्र मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में हैं।
मामले को लेकर केंद्र सरकार और CBSE से जवाब मांगा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि अगर कंपनी का पिछला रिकॉर्ड विवादास्पद था, तो फिर उसे दोबारा इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर SIT का गठन किया जाए।
हालांकि, CBSE या केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं जैसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।
फिलहाल यह मुद्दा छात्रों, अभिभावकों और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि CBSE और सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।