June 21, 2026

चीन की नई लैब बदल सकती है कंप्यूटिंग की दुनिया

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चीन ने अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग तकनीक की वैश्विक दौड़ में एक बड़ा कदम उठाते हुए शंघाई में एक समर्पित फोटोनिक कंप्यूटिंग लैब की शुरुआत की है। शंघाई जियाओ टोंग विश्वविद्यालय में स्थापित यह अत्याधुनिक केंद्र ऐसी कंप्यूटिंग तकनीकों पर काम करेगा जो बिजली के बजाय प्रकाश का उपयोग करती हैं। माना जा रहा है कि यह तकनीक प्रोसेसिंग स्पीड को कई गुना बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा खपत को भी काफी कम कर सकती है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भर में AI और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है।

पारंपरिक सेमीकंडक्टर चिप्स में डेटा प्रोसेसिंग के लिए इलेक्ट्रॉनों का उपयोग किया जाता है, जबकि फोटोनिक कंप्यूटिंग में प्रकाश के कण यानी फोटॉन्स काम करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि फोटॉन्स इलेक्ट्रॉनों की तुलना में अधिक तेज़ी से डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं, कम गर्मी पैदा करते हैं और बेहतर बैंडविड्थ व ऊर्जा दक्षता प्रदान करते हैं। इससे वर्तमान चिप तकनीक की कई सीमाओं को पार किया जा सकता है, खासकर तब जब AI मॉडल लगातार अधिक जटिल और शक्तिशाली होते जा रहे हैं।

शंघाई की यह नई प्रयोगशाला फोटोनिक चिप आर्किटेक्चर, ऑप्टिकल डिवाइस, कंप्यूटिंग सिस्टम और संबंधित सॉफ्टवेयर के विकास पर काम करेगी। यह परियोजना शंघाई जियाओ टोंग विश्वविद्यालय और Lightelligence के सहयोग से शुरू की गई है। चीन इस तकनीक को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है, क्योंकि इससे देश की कंप्यूटिंग क्षमता मजबूत होगी और AI क्षेत्र में उसकी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बढ़ सकती है।

हालांकि फोटोनिक कंप्यूटिंग की संभावनाएं बेहद आकर्षक हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके व्यापक व्यावसायिक उपयोग से पहले कई तकनीकी चुनौतियों को हल करना होगा। शोधकर्ताओं को ऐसे सॉफ्टवेयर, एल्गोरिदम और इंजीनियरिंग समाधान विकसित करने होंगे जो प्रकाश-आधारित हार्डवेयर की पूरी क्षमता का उपयोग कर सकें। फिर भी, इस नई लैब की शुरुआत यह संकेत देती है कि चीन भविष्य की कंप्यूटिंग तकनीकों में नेतृत्व हासिल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो आने वाले वर्षों में AI, डेटा सेंटर और वैश्विक चिप उद्योग की दिशा बदल सकती हैं।

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