सिर्फ धूप, पानी और हवा से बनेगा फ्यूल
जापान के वैज्ञानिकों ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी कृत्रिम “पत्ती” विकसित की है, जो केवल सूर्य की रोशनी, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की मदद से ईंधन तैयार कर सकती है। सबसे खास बात यह है कि इस प्रणाली को चलाने के लिए किसी बैटरी या बाहरी बिजली नियंत्रण तंत्र की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे इसकी लागत और जटिलता दोनों कम हो जाती हैं।
यह नई तकनीक कार्बन डाइऑक्साइड और शुद्ध पानी को मिलाकर फॉर्मिक एसिड नामक तरल ईंधन तैयार करती है। फॉर्मिक एसिड को भविष्य के स्वच्छ ईंधनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह हाइड्रोजन को सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सकता है और ऊर्जा भंडारण का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इस प्रक्रिया के जरिए वातावरण में मौजूद CO₂ को उपयोगी ऊर्जा स्रोत में बदला जा सकता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भविष्य की ऊर्जा क्रांति का आधार बन सकती है। बैटरी-मुक्त प्रणाली के कारण इसे दूरदराज के क्षेत्रों में भी आसानी से लगाया जा सकेगा और रखरखाव की लागत कम होगी। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा केवल बिजली पैदा करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सीधे ईंधन बनाकर ऊर्जा भंडारण और परिवहन के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव ला सकती है।
