चिनाब पर भारत का बड़ा दांव, पाकिस्तान में क्यों मची बेचैनी?
नई दिल्ली: भारत के एक महत्वाकांक्षी जल एवं ऊर्जा परियोजना ने पड़ोसी पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित चिनाब–ब्यास लिंक टनल परियोजना को लेकर पाकिस्तान ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अपनी अर्थव्यवस्था व जल सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। लेकिन आखिर यह परियोजना है क्या, और इसे लेकर इतना शोर क्यों मचा है?
सरकारी योजनाओं के अनुसार, इस परियोजना से हिमाचल प्रदेश में लगभग 4,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की संभावना है। इसके साथ ही जल प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि अगस्त 2026 से परियोजना पर काम शुरू हो सकता है।
इसी बीच पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि यह परियोजना सिंधु जल संधि की भावना के खिलाफ है और इससे चिनाब नदी के जल प्रवाह पर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत जल को “रणनीतिक हथियार” की तरह इस्तेमाल करने की दिशा में बढ़ रहा है। हालांकि भारत की ओर से इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों के नजरिए से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अहम है। जिस क्षेत्र में यह परियोजना प्रस्तावित है, वह भूस्खलन, अचानक बाढ़, ग्लेशियर झील फटने जैसी प्राकृतिक चुनौतियों के लिए संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
दिलचस्प बात यह है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को “स्थगित” रखने का संकेत दिया था। ऐसे में चिनाब–ब्यास परियोजना को केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीति और जल कूटनीति के बड़े परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा रहा है।
फिलहाल, परियोजना अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसकी गूंज दिल्ली से लेकर इस्लामाबाद तक सुनाई देने लगी है। आने वाले दिनों में यह परियोजना दक्षिण एशिया की सबसे चर्चित जल और ऊर्जा योजनाओं में शामिल हो सकती है।
