पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जोरदार हमला बोलते हुए दावा किया कि “दिल्ली में बीजेपी सरकार के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं।”
कोलकाता स्थित अपने आवास पर टीएमसी विधायकों की बैठक को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में बनी नई बीजेपी सरकार अल्पसंख्यक समुदायों और सड़क किनारे दुकानदारों को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई और हॉकरों को हटाने की घटनाएं आम लोगों में डर पैदा करने की राजनीति का हिस्सा हैं।
ममता ने कहा कि “सरकार संवैधानिक मूल्यों के साथ छेड़छाड़ कर रही है।” उन्होंने राज्य में बढ़ती “बुलडोजर संस्कृति” की भी कड़ी आलोचना की। उनके ये बयान ऐसे समय आए हैं जब बंगाल में हालिया राजनीतिक घटनाओं और प्रशासनिक कार्रवाइयों को लेकर बीजेपी और टीएमसी के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
इस बैठक में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी आक्रामक तेवर दिखाए। हाल ही में दक्षिण कोलकाता स्थित उनके घर पर कथित अवैध निर्माण को लेकर तोड़फोड़ का नोटिस भेजा गया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक ने साफ कहा कि वे किसी भी दबाव या डर के आगे झुकने वाले नहीं हैं और बीजेपी के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, “जो करना है कर लो, मेरा घर गिराना है तो गिरा दो, लेकिन मैं झुकूंगा नहीं।” उनके इस बयान ने पूरे विवाद को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया।
राजनीतिक हमला यहीं नहीं रुका। अभिषेक ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर भी निशाना साधते हुए नारदा स्टिंग ऑपरेशन का जिक्र किया और सवाल उठाया कि जिन पर कभी कैमरे पर पैसे लेने के आरोप लगे थे, उन्हें बीजेपी ने मुख्यमंत्री कैसे बना दिया।
इधर टीएमसी ने अब “जबरन बेदखली” और “बुलडोजर राजनीति” के खिलाफ राज्यभर में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। कोलकाता और आसपास के कई इलाकों में प्रदर्शन की तैयारी चल रही है, जिससे राज्य की सियासत और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।
तेज बयानबाजी, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और खुली चुनौतियों के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति अब एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जिसका असर आने वाले समय में राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।