June 1, 2026

गाँव की छोटी दुकानों से बना ₹1176 करोड़ का साम्राज्य! बेंगलुरु के स्टार्टअप ने बदल दी ग्रामीण भारत की तस्वीर

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कभी गांवों की छोटी किराना दुकानों को सिर्फ “लोकल दुकान” माना जाता था।लेकिन अब यही दुकानें एक ऐसे बिजनेस मॉडल की ताकत बन चुकी हैं, जिसने ₹1176 करोड़ का कारोबार खड़ा कर दिया है।

बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी VilCart आज दक्षिण भारत के 30,000 से ज्यादा गांवों और 1 लाख से अधिक किराना स्टोर्स को जोड़ चुकी है।यह कंपनी गांवों तक जरूरी सामान, FMCG प्रोडक्ट्स और रोजमर्रा की चीजें पहुंचाने का काम कर रही है — वो भी टेक्नोलॉजी और स्मार्ट सप्लाई चेन की मदद से।

कैसे शुरू हुई इतनी बड़ी कहानी?

2018 में शुरू हुई इस कंपनी का मकसद था ग्रामीण भारत की सबसे बड़ी समस्या को हल करना —“गांवों तक सही सामान सही समय पर पहुंचाना।”जहां शहरों में क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन डिलीवरी तेजी से बढ़ रही थी, वहीं गांवों में अब भी सप्लाई और प्रोडक्ट्स की भारी कमी थी।VilCart ने इसी गैप को अवसर बना दिया।

1 लाख दुकानों का नेटवर्क

आज कंपनी किसानों, छोटे व्यापारियों, ब्रांड्स और गांव की किराना दुकानों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ रही है।इस नेटवर्क की मदद से गांवों में रहने वाले लोगों को अब पहले से ज्यादा विकल्प और बेहतर कीमतें मिल रही हैं।

₹1176 करोड़ का कारोबार

FY26 में कंपनी ने ₹1176 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया।दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने बिना ज्यादा दिखावे और शोर के पिछले 5 सालों में अपने बिजनेस को लगभग 5.6 गुना बढ़ा लिया।

गांव अब सिर्फ “बाजार” नहीं, नया भारत हैं

कंपनी के फाउंडर सी. प्रसन्ना कुमार का कहना है कि“गांवों में मांग भी है, सपने भी हैं और कारोबार करने की ताकत भी… कमी सिर्फ मजबूत सिस्टम की थी।”

अब कंपनी अपने प्राइवेट लेबल प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी नेटवर्क को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है।

क्यों खास है यह कहानी?

क्योंकि यह सिर्फ एक स्टार्टअप की सफलता नहीं…बल्कि उस बदलते भारत की कहानी है जहां गांव अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहे।

अब गांवों की छोटी दुकानें भी करोड़ों के डिजिटल बिजनेस की ताकत बन रही हैं।