Historic Agreement:ऐतिहासिक समझौता: खत्म हुआ हरियाणा-राजस्थान का 32 साल पुराना पानी विवाद,चूरू, सीकर और झुंझुनूं के करोड़ों लोगों को मिलेगा शुद्ध पेयजल
सर्च न्यूज: सच के साथ: हरियाणा और राजस्थान के बीच 32 साल पुराना यमुना जल विवाद सुलझ गया है, जिसके तहत राजस्थान के सूखाग्रस्त शेखावाटी क्षेत्र को उसका हक दिलाने के लिए दोनों राज्यों के बीच ऐतिहासिक सहमति बनी है।
परियोजना की रूपरेखा और जल आपूर्ति:तय किए गए फॉर्मूले के तहत मानसून के सीजन (जुलाई से अक्टूबर) के दौरान हरियाणा के हथनीकुंड बैराज से राजस्थान को उसका आवंटित 577 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी दिया जाएगा। यह जल आपूर्ति तब सुनिश्चित की जाएगी जब हरियाणा अपनी ‘वेस्टर्न यमुना कैनाल’ की पूरी क्षमता (24,000 क्यूसेक) का उपयोग कर लेगा। इसके अलावा, ऊपरी यमुना बेसिन में बन रहे रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ बांध परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राजस्थान को मानसून के अतिरिक्त बचे हुए महीनों में भी पीने का पानी मिल सकेगा।
अंडरग्राउंड पाइपलाइन नेटवर्क:यमुना के पानी को राजस्थान तक सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए एक विशाल और आधुनिक भूमिगत पाइपलाइन (Underground Pipeline) नेटवर्क तैयार किया जाएगा। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के सुझावों के अनुसार, हथनीकुंड बैराज से राजस्थान के चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक लगभग 250 से 265 किलोमीटर लंबी तीन या चार समानांतर पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी। इस पूरी ढांचागत परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए दोनों राज्यों ने अपनी संयुक्त विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप दिया है।
शेखावाटी क्षेत्र को लाभ:इस महत्वाकांक्षी परियोजना से राजस्थान के गंभीर जल संकट से जूझ रहे शेखावाटी क्षेत्र (चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों) को सबसे बड़ा फायदा होगा। इन क्षेत्रों में लगातार घटते भूजल स्तर और पानी में फ्लोराइड की बढ़ती समस्या से वर्षों से लोग परेशान थे। परियोजना के पहले चरण में इस नेटवर्क के जरिए इन जिलों में शुद्ध पेयजल (Drinking Water) की कमी को दूर किया जाएगा, जबकि इसके अगले चरण में क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी
