भुगतान रुका तो थम गया विकास, करोड़ों फंसे
झारखंड के लातेहार जिले में विकास योजनाओं पर अचानक ब्रेक लग गया है। विभिन्न विभागों के तहत काम पूरा कर चुके संवेदकों का भुगतान पिछले डेढ़ महीने से अटका हुआ है, जिससे करोड़ों रुपये की परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। सड़क, भवन, पेयजल, सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी कई योजनाएं पूरी होने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से निर्माण एजेंसियों और मजदूरों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
संवेदकों का कहना है कि कई क्षेत्रों में मिट्टी और मोरम के लिए वैध लाइसेंस या रॉयल्टी चालान उपलब्ध कराने की व्यवस्था ही नहीं है। पहले नियम-55 के तहत चालान उपलब्ध नहीं होने पर समतुल्य दंड राशि जमा कर भुगतान प्राप्त किया जा सकता था, लेकिन नियम समाप्त होने के बाद यह विकल्प भी खत्म हो गया। नतीजतन, कार्य पूर्ण होने के बावजूद फाइलें विभागों में अटकी हुई हैं और ठेकेदारों की कार्यशील पूंजी फंस गई है।
मामले को लेकर बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था केवल लातेहार ही नहीं, बल्कि राज्यभर की विकास परियोजनाओं को प्रभावित कर रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो कई योजनाएं अधर में लटक सकती हैं और विकास की रफ्तार और धीमी पड़ सकती है। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है, जो हजारों मजदूरों, संवेदकों और विकास कार्यों के भविष्य को तय करेगा।
