Jamshedpur Ex MLA Kunal Sarangi Mount Everest Base Camp Tracking : दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट के बेस कैंप तक ट्रैक कर लौटे कुणाल
पूर्व विधायक बोले ‘हर कदम ने सिखाया नया सबक’, सबका जताया आभार
जमशेदपुर : बहरागोड़ा के पूर्व विधायक सह झामुमो के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी हाल ही में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक सफल ट्रेकिंग कर लौटे हैं. श्री षाड़ंगी अपनी कठिन यात्रा का अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया. उन्होंने बताया कि कड़ी मेहनत, ठंड और कम ऑक्सीजन के बावजूद यह सफर उनके लिए यादगार और सीख से भरा रहा. उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों से ही उनके मन में नेपाल के लुकला से एवरेस्ट बेस कैम्प तक ट्रेक करने का सपना था, जो अब जाकर पूरा हुआ. यात्रा की शुरुआत उन्होंने काठमांडू स्थित प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर की.
टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन के सहयोग से कई सप्ताह की तैयारी के बाद 10 सदस्यों की टीम ने लगातार 8 दिनों तक प्रतिदिन 8-9 घंटे कठिन हिमालयी परिस्थितियों में ट्रेकिंग की. यह यात्रा लुक्ला से फाकडिंग, नामचे बाजार, डिबोचे, डिंबोचे, लाबोचे और गोरक्षेप होते हुए अंततः एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंची.
कुणाल षाड़ंगी ने बताया कि ट्रेक के अंतिम तीन दिनों में तापमान -17 से -20 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जबकि दिन में भी तापमान -5 से -7 डिग्री के बीच रहा. समुद्र तल की तुलना में ऑक्सीजन की मात्रा मात्र 50-60 प्रतिशत रह गई थी, जिससे सांस लेना चुनौतीपूर्ण हो गया था. उन्होंने कहा कि 5,364 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट बेस कैंप पर तिरंगा और पार्टी का झंडा लहराना उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण रहा. “बेहद ठंडी हवाएं, कम ऑक्सीजन, नेटवर्क का अभाव और लगातार चढ़ाई के बावजूद जैसे ही बेस कैंप का साइनबोर्ड और माउंट एवरेस्ट की झलक मिली, सारी थकान दूर हो गई. उन्होंने यह भी बताया कि पूरी यात्रा के दौरान उन्हें हाई एल्टीट्यूड सिकनेस की दवा डायमोक्स लेने की जरूरत नहीं पड़ी, जो उनके लिए एक बड़ी राहत की बात रही. इस उपलब्धि के लिए उन्होंने अपने माता-पिता, बड़े भाई समान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पत्नी डॉ. श्रद्धा, बेटी माही, परिवार के अन्य सदस्यों, मित्रों और झामुमो कार्यकर्ताओं का आभार जताया. साथ ही अपने गाइड अनंत राणा, धीरज और सभी पोर्टरों के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक ट्रेक नहीं, बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा, जिसने सिखाया कि परिस्थितियां कैसी भी हों, आगे बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है.

