June 18, 2026

झारखंड के आम ने पार किया सात समंदर! ‘पलाश’ ब्रांड की मिठास लंदन-दुबई तक, गांव की दीदियों ने लिखी सफलता की नई कहानी

Screenshot_20260618_104638_Chrome

रांची: कभी गांवों के बागानों तक सीमित रहने वाला झारखंड का आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहा है। राज्य की ग्रामीण महिलाओं और किसानों की मेहनत, संगठित प्रयासों और ‘पलाश’ ब्रांड की ताकत ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हो रही है। लंदन और दुबई जैसे वैश्विक बाजारों तक झारखंड के आम की पहुंच ने राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।

इस सफलता की सबसे खास बात यह है कि इसके केंद्र में झारखंड की सखी मंडल की महिलाएं हैं। आम की तुड़ाई से लेकर ग्रेडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक की जिम्मेदारी संभाल रहीं ये महिलाएं अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई पहचान बन चुकी हैं। जिस आम को कभी स्थानीय बाजारों तक पहुंचाने में मुश्किलें आती थीं, वही आज अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के साथ विदेशों में भेजा जा रहा है।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की पहल पर शुरू हुई बिरसा हरित ग्राम योजना ने इस बदलाव की मजबूत नींव रखी। योजना के तहत बड़े पैमाने पर फलदार पौधों का रोपण किया गया, जिसका परिणाम आज लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आय और रोजगार के रूप में सामने आ रहा है। राज्य के हजारों एकड़ में फैले आम के बागान अब किसानों के लिए कमाई का बड़ा स्रोत बन चुके हैं।

झारखंड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव के तहत आमों को गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बाजार से जोड़ा गया है। प्रीमियम गुणवत्ता वाले आम विदेशों में निर्यात किए जा रहे हैं, जबकि अन्य श्रेणियों के आम देश के बड़े रिटेल नेटवर्क और स्थानीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने के साथ-साथ बाजार का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल आम की बिक्री की कहानी नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की कहानी है। ‘पलाश’ ब्रांड अब एक उत्पाद नहीं, बल्कि झारखंड की नई पहचान बनता जा रहा है। गांवों की मेहनत जब सही योजना और बाजार से जुड़ती है, तो उसकी मिठास सचमुच सात समंदर पार तक पहुंच जाती है।

You may have missed