June 3, 2026

“जमीन नहीं देंगे!”… हाईवे के खिलाफ सड़क पर उतरे झारखंड के टाना भगत

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झारखंड के गुमला में बनने जा रहे बड़े हाईवे प्रोजेक्ट को लेकर अब आदिवासी इलाकों में विरोध तेज हो गया है। टाना भगत समुदाय ने साफ कह दिया है कि विकास के नाम पर उनकी जमीन, जंगल और धार्मिक पहचान से समझौता नहीं होगा।

दरअसल, केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना के तहत NH-43 को चौड़ा कर रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाया जा रहा है। करीब 1200 करोड़ रुपये की इस परियोजना से सफर का समय तो कम होगा, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसकी कीमत उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन और आजीविका देकर चुकानी पड़ेगी।

टाना भगत समुदाय का कहना है कि जिस इलाके से हाईवे गुजर रहा है, वह संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत संरक्षित क्षेत्र है। यहां की जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, आस्था और पहचान का हिस्सा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना उनकी सहमति के जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

कौन हैं टाना भगत?

टाना भगत झारखंड का एक आदिवासी धार्मिक-सामाजिक आंदोलन है, जिसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन के खिलाफ हुई थी। यह समुदाय अहिंसा, सादगी और गांधीवादी विचारों के लिए जाना जाता है। सफेद कपड़े, सिर पर गांधी टोपी और शांतिपूर्ण विरोध उनकी पहचान मानी जाती है।

अब यही समुदाय हाईवे परियोजना के खिलाफ लामबंद हो रहा है। गांवों में लगातार बैठकें हो रही हैं और लोग इसे सिर्फ सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि “अस्तित्व की लड़ाई” बता रहे हैं।

सरकार जहां इस परियोजना को विकास और कनेक्टिविटी के लिए जरूरी बता रही है, वहीं टाना भगत समुदाय पूछ रहा है — “अगर विकास हमारी जमीन और पहचान छीन ले, तो वह विकास किसके लिए?”