कलकत्ता हाइकोर्ट का बेहद महत्वपूर्ण फैसला: मजिस्ट्रेट खुद प्रारंभिक जांच करेंगे , पुलिस को नहीं सौंप सकते जिम्मेदारी
सर्च न्यूज: सच के साथ: कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि मजिस्ट्रेट खुद प्रारंभिक जांच करेंगे और इसे पुलिस को नहीं सौंप सकते हैं। यह फैसला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 175(3) के तहत आया है, जो पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) का स्थान लेती है। हाइकोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को जांच के आदेश देने से पहले दो महत्वपूर्ण बातों पर संतुष्ट होना जरूरी है – पहला, क्या शिकायत में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है; और दूसरा, क्या जांच के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है ¹ ²।इस फैसले के अनुसार, मजिस्ट्रेट को अपनी जांच विस्तृत या गहन नहीं करनी चाहिए, बल्कि यह सीमित दायरे में यह देखने के लिए होती है कि कानून की शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं। अगर मजिस्ट्रेट बिना इन पहलुओं पर विचार किए सीधे पुलिस को जांच का आदेश देते हैं, तो यह कानूनन गलत है ¹।हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट को जांच का आदेश देने से पहले पुलिस अधिकारी के बयान पर विचार करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच के लिए पर्याप्त आधार है। यह फैसला मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी को बढ़ाता है और पुलिस जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का प्रयास करता है ।

