सर्च न्यूज: सच के साथ: जुगसलाई में कचरा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जहां लगातार बढ़ते कूड़े के ढेर और खराब निस्तारण व्यवस्था से स्थानीय लोग परेशान हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण नजदीक आने के बावजूद डंपिंग यार्ड और आसपास की सड़कों की स्थिति ने जुगसलाई नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण करने के बजाय खुले में सड़क किनारे कूड़ा फेंका जा रहा है, जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों की शिकायत है कि महाकालेश्वर घाट के पास स्थित डंपिंग क्षेत्र अब स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद के कर्मचारी अक्सर सड़कों के किनारे कचरा छोड़ देते हैं, जिससे दुर्गंध फैलती है, यातायात बाधित होता है और आसपास की बस्तियों में बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। बारिश के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है, जब गंदगी बहकर पूरे इलाके में फैल जाती है और हजारों लोगों के लिए अस्वच्छ माहौल पैदा कर देती है।
विवाद को और बढ़ाने वाली बात यह है कि पहले यहां कचरा प्रसंस्करण मशीनें लगाने पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन आरोप है कि यह व्यवस्था कभी ठीक से काम ही नहीं कर पाई। दूसरी ओर नगर परिषद हाल के दिनों में “जीरो वेस्ट” अभियान, कचरा अलग करने की मुहिम और होटल, बैंक्वेट हॉल व बड़े कचरा उत्पादकों के लिए नए दिशा-निर्देश लागू करने का दावा कर रही है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि कागजों पर किए जा रहे दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल जुगसलाई तक सीमित नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन की बड़ी समस्या को दर्शाता है। पर्यावरण अनुपालन रिपोर्टों में भी जुगसलाई नगर परिषद सहित कई शहरी निकायों में बेहतर ठोस कचरा प्रबंधन ढांचे की जरूरत बताई गई है। अब स्वच्छता रैंकिंग और जनस्वास्थ्य दोनों सवालों के घेरे में हैं, जबकि स्थानीय लोग नगर परिषद से तत्काल कार्रवाई, वैज्ञानिक कचरा निस्तारण और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं, ताकि यह समस्या भविष्य में बड़े संकट का रूप न ले सके।