June 3, 2026

‘लड़ेंगे या मरेंगे’… ममता का शक्ति प्रदर्शन फीका! धरने में पहुंचे सिर्फ 8 विधायक

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर ममता बनर्जी अपने पुराने ‘स्ट्रीट फाइटर’ अंदाज़ में नजर आईं, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ बदली-बदली दिखी। कोलकाता के बीचों-बीच धरने पर बैठीं ममता ने बीजेपी पर टीएमसी नेताओं को डराने, हमला कराने और पार्टी तोड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया। मंच से उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा — “लड़ेंगे या मरेंगे… सत्ता से हटाकर ही दम लेंगे।”

हालांकि ममता का यह प्रदर्शन उतना दमदार नहीं दिखा, जितनी उम्मीद की जा रही थी। पार्टी के 80 विधायकों में से सिर्फ 8 विधायक और 6 सांसद ही धरने में पहुंचे। यही वजह रही कि बंगाल की सियासत में अब टीएमसी के अंदरूनी हालात और संभावित टूट की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

दरअसल, विधानसभा चुनाव में हार के बाद यह ममता बनर्जी का पहला बड़ा सड़क आंदोलन था। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव में “वोट लूटने” के बाद अब टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ममता ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमलों का भी जिक्र किया और कहा कि डराकर उनकी पार्टी को खत्म नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह धरना सिर्फ बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर अपनी पकड़ और ताकत दिखाने की कोशिश भी था। लेकिन कम संख्या में नेताओं की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या ममता बनर्जी फिर से अपने पुराने आंदोलनकारी अंदाज़ से वापसी करेंगी, या टीएमसी के भीतर बढ़ती दूरी आने वाले दिनों में नई सियासी हलचल पैदा करेगी?