June 29, 2026

मिड-डे मील से अंडे हटे, पोषण पर छिड़ी नई बहस

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पश्चिम बंगाल में स्कूली बच्चों के मिड-डे मील से अंडे हटाने के फैसले ने राजनीतिक और पोषण संबंधी बहस को तेज कर दिया है। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट के तहत अब इस्कॉन द्वारा तैयार शाकाहारी भोजन परोसा जाएगा। इस्कॉन की आजीवन शाकाहारी नीति के कारण अंडों की जगह पनीर, सोया, राजमा, दालें और दूध से बने खाद्य पदार्थ बच्चों को दिए जाएंगे।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. सुनीत खन्ना ने कहा कि बहस का केंद्र राजनीति नहीं, बल्कि बच्चों का पोषण होना चाहिए। उन्होंने माना कि इस्कॉन और जैन समुदाय जैसे संगठन अपनी धार्मिक मान्यताओं और अहिंसा के सिद्धांत के कारण शाकाहारी भोजन पर जोर देते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंडा बच्चों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला संपूर्ण प्रोटीन, विटामिन बी12, विटामिन डी, आयरन और कोलीन जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का उत्कृष्ट स्रोत है।

डॉ. खन्ना के अनुसार, यदि अंडे उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं तो सोया और टोफू सबसे उपयुक्त शाकाहारी विकल्प माने जा सकते हैं, क्योंकि इनमें भी उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन होता है। वहीं पनीर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है, जबकि सब्जियां विटामिन, खनिज, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल विचारधारा के आधार पर पोषण संबंधी निर्णय नहीं लिए जाने चाहिए और बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

राज्य सरकार ने हाल ही में प्राथमिक विद्यालयों के मिड-डे मील पर प्रति छात्र सामग्री लागत ₹6.78 से बढ़ाकर ₹10 करने की घोषणा की है, जिसका स्वागत किया गया। लेकिन अंडों की जगह शाकाहारी विकल्पों को शामिल किए जाने के फैसले ने पश्चिम बंगाल की खाद्य संस्कृति और राजनीतिक विमर्श को फिर गर्मा दिया है। विपक्षी दलों ने इसे राज्य की पारंपरिक खान-पान की आदतों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि बच्चों को पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रोटीन से भरपूर वैकल्पिक खाद्य पदार्थ दिए जाएंगे।